तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट एक बार फिर सुर्खियों में है। पार्टी की राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद और पूर्व कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर जारी असंतोष की चर्चाओं को भी तेज कर दिया है।
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई नेताओं के असंतोष और इस्तीफों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
राज्यसभा सदस्य पद से दिया इस्तीफा
असम के सिलचर से पूर्व लोकसभा सांसद रह चुकीं सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की अपील की। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे के कारणों को सार्वजनिक रूप से विस्तार से साझा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और अंदरूनी तनाव से जुड़ा हो सकता है।
कांग्रेस से TMC तक का राजनीतिक सफर
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सुष्मिता देव का राजनीतिक करियर काफी उल्लेखनीय रहा है। वह पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वरिष्ठ नेता थीं और 2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी में शामिल होते ही उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। बाद में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा, जो उनके तेजी से बढ़ते राजनीतिक कद को दर्शाता था।
ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा देना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सुष्मिता देव से पहले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के पूर्व मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे ने पहले ही राजनीतिक हलकों में चर्चा का माहौल बना दिया था।
रिपोर्टों के अनुसार, उनके इस्तीफे के पीछे पार्टी नेतृत्व से असंतोष और संगठनात्मक मुद्दों को कारण बताया गया था। अब एक और वरिष्ठ नेता के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर संभावित दरार की आशंका को और मजबूत कर दिया है।
पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत
पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ नेता पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं पर दूसरी राजनीतिक पार्टियों के साथ संपर्क में रहने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर बागी नेताओं की आलोचना करते हुए उन पर भाजपा के साथ नजदीकी संबंधों का आरोप लगाया है, जबकि असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक संवाद की कमी है।








