यूपी में पहली बार ट्रैप कैमरों से होगी गुलदारों की गिनती, खेतों में शुरू होगा सर्वे

बिजनौर में पहली बार ट्रैप कैमरों की मदद से गुलदारों की गणना की जाएगी। सर्वे से उनकी संख्या, गतिविधियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की रणनीति तैयार होगी।

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पहली बार अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के बाहर खेतों में ट्रैप कैमरों की मदद से गुलदारों की गणना की जाएगी। सर्वे का उद्देश्य गुलदारों की संख्या और उनके व्यवहार का अध्ययन कर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।

बिजनौर: उत्तर प्रदेश में पहली बार गुलदारों की गणना आधुनिक ट्रैप कैमरा तकनीक से की जाएगी। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के ग्रामीण इलाकों में शुरू होने वाले इस सर्वे के जरिए गुलदारों की वास्तविक संख्या, उनके फैलाव और शावकों की मौजूदगी का आकलन किया जाएगा, जिससे वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा रणनीति को बेहतर बनाया जा सके।

अमानगढ़ के बाहर खेतों में लगेगा निगरानी तंत्र

बिजनौर जिले में वन विभाग और विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से गुलदारों की गणना का विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत अमानगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में आने-जाने वाले गुलदारों की तस्वीरें और गतिविधियां रिकॉर्ड की जाएंगी।

यूपी में पहली बार ट्रैप कैमरों से होगी गुलदारों की गिनती, खेतों में शुरू होगा सर्वे

विशेषज्ञ इन आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाएंगे कि क्षेत्र में कुल कितने गुलदार मौजूद हैं, उनमें कितने वयस्क हैं और कितने शावक हैं। यह जानकारी भविष्य की वन्यजीव संरक्षण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

बढ़ती मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता

शिवालिक पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित बिजनौर जिले में पिछले कुछ वर्षों में गुलदारों की संख्या और उनका फैलाव तेजी से बढ़ा है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास से निकलकर गुलदार अब जिले के कई ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुके हैं।

वन विभाग के पूर्व सर्वेक्षण में करीब 460 गांवों में गुलदारों की मौजूदगी के संकेत मिले थे। वहीं स्थानीय किसानों का दावा है कि जिले के अधिकांश गांवों में गुलदार देखे जाते हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक संख्या और गतिविधियों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी माना जा रहा है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में मिलेगी मदद

इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य केवल संख्या पता करना नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना भी है। ट्रैप कैमरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर वन विभाग उन क्षेत्रों की पहचान कर सकेगा जहां गुलदारों की गतिविधि अधिक है।

सर्वे की शुरुआत अमानगढ़ क्षेत्र से जुड़े भिक्कावाला, कल्लूवाला, फतेहपुर धारा, केहरीपुर, खैरपुरी, मीरापुर, छजलमलवाला और रेहड़ जैसे गांवों के आसपास हो सकती है। ट्रैप कैमरों के साथ-साथ पंजों के निशानों और अन्य संकेतों को भी अध्ययन का आधार बनाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वैज्ञानिक गणना से गुलदारों के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आबादी की सुरक्षा के लिए भी बेहतर कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी।

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