अमेरिका ने ईरान के पांच शहरों पर लगातार 11वीं रात एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पर बड़े हमले की चेतावनी दी, जबकि दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं।
ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार अधिक गंभीर होता दिखाई दे रहा है। संघर्षविराम टूटने के बाद अमेरिका ने लगातार 11वीं रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस बार चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह समेत पांच शहरों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और तनाव पहले से अधिक बढ़ गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमलों का वीडियो भी जारी किया, जिसमें लड़ाकू विमानों और मिसाइलों के जरिए लक्ष्यों पर कार्रवाई दिखाई गई। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान के अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और स्वतंत्र रूप से उनकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रम्प ने संदिग्ध परमाणु ठिकाने पर बड़े हमले की चेतावनी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध भूमिगत परमाणु परिसर "पिकऐक्स माउंटेन" पर जल्द ही बड़ा और शक्तिशाली हमला कर सकता है। ट्रम्प के अनुसार यदि ईरान अपनी गतिविधियों में बदलाव नहीं करता तो अमेरिका सभी विकल्प खुले रखेगा। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो संघर्ष का दायरा पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
पिकऐक्स माउंटेन क्यों बना चर्चा का केंद्र
पिकऐक्स माउंटेन तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण और नतांज परमाणु केंद्र के पास स्थित एक भूमिगत परिसर है। यह पहाड़ के भीतर लगभग 100 मीटर की गहराई में विकसित किया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार इसका निर्माण वर्ष 2020 में नतांज परमाणु केंद्र में हुए विस्फोट के बाद शुरू किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका उपयोग आधुनिक सेंट्रीफ्यूज निर्माण और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य कार्यों के लिए किया जा सकता है। हालांकि यह परिसर अभी पूरी तरह संचालन में नहीं आया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी गहराई इतनी अधिक है कि इसे केवल हवाई हमलों से पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि इस परिसर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है।
युद्ध पर अमेरिका का खर्च तेजी से बढ़ा
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की विनियोग समिति को बताया कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य अभियानों पर अब तक लगभग 37.5 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पेंटागन ने अतिरिक्त 87 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है। प्रस्तावित राशि का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में जारी सैन्य अभियानों, हथियारों, सैनिकों के वेतन, प्रशिक्षण और गोला-बारूद की आपूर्ति पर खर्च किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यदि अतिरिक्त बजट नहीं मिला तो भविष्य के सैन्य अभियानों और सेना की संचालन क्षमता पर असर पड़ सकता है।
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तेहरान समेत कई इलाकों में एयर डिफेंस सक्रिय
हमलों के बाद ईरान ने राजधानी तेहरान सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए। सरकारी मीडिया के अनुसार पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में वायु सुरक्षा इकाइयों ने निगरानी बढ़ा दी। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में भी सैन्य गतिविधियां तेज देखी गईं। बुशहर क्षेत्र में धमाकों की खबरें भी सामने आईं, जहां ईरान का प्रमुख परमाणु बिजलीघर स्थित है। हालांकि इन घटनाओं के संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी भी लगातार तेज हो रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यदि ईरान गंभीरता से बातचीत करना चाहता है तो अमेरिका भी बातचीत और समझौते के लिए तैयार है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका विवादों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से चाहता है, लेकिन यदि उसके हितों या सहयोगी देशों की सुरक्षा को खतरा हुआ तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। दूसरी ओर ईरान ने दोहराया कि लगातार सैन्य हमले किसी भी वार्ता की संभावना को कमजोर करते हैं और यदि स्थिति नहीं बदली तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
सऊदी अरब के साथ परमाणु सहयोग समझौता
इसी बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते को मंजूरी दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते के तहत अमेरिका परमाणु तकनीक साझा करेगा और अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में भाग लेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता मध्य पूर्व में रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है।
क्षेत्रीय घटनाक्रम भी बने चिंता का कारण
संघर्ष के बीच कई अन्य घटनाक्रम भी सामने आए हैं। हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद भारत और चीन के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहे कुछ टैंकरों ने अपना समुद्री मार्ग बदल दिया। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं।
वहीं कतर ने हालिया हमलों से हुए नुकसान के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर ईरान के गृह मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा कर वहां के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व से मुलाकात की, जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
आगे क्या?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। लगातार हो रहे हवाई हमले, बढ़ता सैन्य खर्च, परमाणु ठिकानों को लेकर बढ़ती बयानबाजी और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका इस संकट को और जटिल बना रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या फिर सैन्य टकराव और अधिक व्यापक रूप लेता है।









