वेस्ट बैंक के कुसरा गांव में तनाव बढ़ा, फलस्तीनी परिवारों की घेराबंदी के बीच अतिरिक्त सैनिक भेजे जाएंगे

वेस्ट बैंक के कुसरा गांव में फलस्तीनी परिवारों के घरों को इजरायली बाशिंदों ने घेर रखा है। इजरायली सेना ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजे

अधिकृत वेस्ट बैंक के कुसरा गांव में दो फलस्तीनी परिवारों के घर कई दिनों से इजरायली बाशिंदों के घेरे में हैं। पानी और बिजली की आपूर्ति कटने के बाद इजरायली सेना ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया है।

वेस्ट बैंक: अधिकृत वेस्ट बैंक के कुसरा गांव में फलस्तीनी परिवारों और इजरायली बाशिंदों के बीच बढ़ते तनाव के बीच इजरायली सेना ने अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का फैसला किया है। सेना के मुताबिक, रविवार से दो फलस्तीनी परिवारों के घरों को घेरकर बैठे इजरायली बाशिंदों को हटाने की पिछली कोशिश सफल नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और बाशिंदों की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

नब्लस के दक्षिण में स्थित कुसरा गांव के बाहरी इलाके में अबू रिदी और हसन परिवार के घर हैं। परिवारों का कहना है कि रविवार से उनके घरों के आसपास आवाजाही बाधित है और पानी तथा बिजली की आपूर्ति भी काट दी गई है। कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकल पाने के कारण उनके पास भोजन का भंडार भी कम हो गया है। परिवारों ने मदद की अपील की है।

घरों के बाहर बढ़ा सुरक्षा घेरा

स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो में कुसरा के आसपास बड़ी संख्या में इजरायली सुरक्षा वाहनों को देखा गया। इनमें एक बुलडोजर भी शामिल था। बाद में दिन के समय बनाए गए वीडियो में फलस्तीनी गांव की ओर जाने वाली सड़क पर इजरायली सुरक्षा बलों की लंबी कतार दिखाई दी।

क्षेत्र को फिलहाल बंद सैन्य क्षेत्र घोषित किया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आसपास मौजूद एक इजरायली बाशिंदा चौकी को भी ध्वस्त किया गया है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं और स्थिति लगातार बदल रही है।

कुसरा में घर के भीतर फंसे कुसाय अबू रिदी ने बताया कि उनके घर पर रात में दोबारा हमला किया गया। उनके अनुसार, कुछ बाशिंदा अभी भी इलाके में मौजूद हैं और सेना से बचने के लिए आसपास छिपे हुए हैं।

अबू रिदी के भाई इस संपत्ति के मालिक हैं और वह फलस्तीनी-अमेरिकी कारोबारी बताए गए हैं। उन्होंने इस मामले की जानकारी अमेरिकी दूतावास को भी दी थी।

अमेरिकी राजदूत ने जताई नाराजगी

इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी दूतावास ने इजरायल से इन बाशिंदों को हटाने का अनुरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और संबंधित लोगों के व्यवहार की आलोचना की।

अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वेस्ट बैंक में इजरायली बाशिंदों की हिंसा और फलस्तीनी नागरिकों के विस्थापन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है।

सैनिकों और बाशिंदों के बीच भी हुआ टकराव

कुसरा में तनाव की शुरुआत रविवार को हुई, जब बाशिंदों ने कथित तौर पर फलस्तीनी परिवारों के घरों तक पहुंचने वाली सड़क को बाधित कर दिया। इसके बाद परिवारों की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद हो गई।

शुरुआत में मौके पर पहुंचे कुछ इजरायली सैनिकों के बाशिंदों के साथ प्रार्थना करने की तस्वीरें सामने आई थीं। घटना के बाद इजरायली सेना ने कहा कि संबंधित सैनिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बुधवार को इजरायली सुरक्षा बलों ने बाशिंदों को इलाके से हटाने का प्रयास किया। इस दौरान सुरक्षा बलों और बड़ी संख्या में जमा बाशिंदों के बीच टकराव हुआ। उपलब्ध फुटेज में सुरक्षा बलों को आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल करते देखा गया। हालांकि, बाशिंदों को पूरी तरह हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी।

कुछ अन्य फुटेज में सुरक्षा बलों को बाशिंदों के लिए लगाए गए एक अस्थायी शेड को हटाते हुए देखा गया, जबकि उनके कुछ दूसरे सामान मौके पर ही मौजूद रहे।

बाशिंदों के मकसद पर सवाल

कुसरा में घरों को घेरने वाले बाशिंदों की सटीक मांग या उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, वेस्ट बैंक में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें फलस्तीनी परिवारों को उनके घरों से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया और बाद में उनकी संपत्तियों पर बाशिंदों ने कब्जा कर लिया।

स्थानीय फलस्तीनी अधिकारियों का आरोप है कि कुसरा को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। गांव के मेयर अब्देल अजीम वादी ने कहा कि स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बाशिंदों की गतिविधियों का एक लगातार पैटर्न देखा है।

पिछले महीने कुसरा में एक नई मस्जिद को आग के हवाले किए जाने की घटना सामने आई थी। घटनास्थल के आसपास हिब्रू भाषा में आपत्तिजनक संदेश भी लिखे गए थे। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।

वेस्ट बैंक में बढ़ते विस्थापन की चिंता

कुसरा की घटना को वेस्ट बैंक में फलस्तीनी विस्थापन और बाशिंदा हिंसा के बढ़ते मामलों की व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। इससे पहले पास के जलूद गांव में भी एक फलस्तीनी परिवार के घर को बाशिंदों ने दो सप्ताह से अधिक समय तक घेर रखा था।

उस घटना के बाद परिवार ने अपना घर छोड़ दिया और बाशिंदों ने कथित तौर पर संपत्ति पर कब्जा कर लिया। यह मामला अब भी क्षेत्र में विस्थापन और संपत्ति अधिकारों को लेकर जारी विवाद का उदाहरण बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में वेस्ट बैंक में इजरायली सेना या बाशिंदों की कार्रवाई में दर्जनों फलस्तीनियों की मौत हुई है। इसी अवधि में इजरायलियों की भी मौतें हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बाशिंदा हिंसा, मकानों के ध्वस्तीकरण और बेदखली के कारण हजारों फलस्तीनियों के विस्थापन को दर्ज किया है।

बस्तियों के विस्तार पर अंतरराष्ट्रीय विवाद

वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का मुद्दा लंबे समय से इजरायल और फलस्तीन के बीच विवाद का प्रमुख हिस्सा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानता है। दूसरी ओर, इजरायली सरकार बस्तियों के अस्तित्व और विस्तार को लेकर अलग रुख रखती है।

संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने बस्तियों को शांति की राह में बाधा मानने की धारणा को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल इन क्षेत्रों से पीछे हटने वाला नहीं है और बस्तियां आगे भी बढ़ती रहेंगी।

इजरायल का कहना है कि इस भूमि से उसके ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध हैं। फलस्तीनी पक्ष इसके विपरीत बस्तियों के विस्तार को अपनी जमीन पर नियंत्रण मजबूत करने और भविष्य में स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की संभावनाओं को कमजोर करने की कोशिश मानता है।

अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से क्या बदलेगा?

कुसरा में अतिरिक्त इजरायली सैनिकों की तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करना और फलस्तीनी परिवारों तथा बाशिंदों के बीच टकराव को रोकना बताया जा रहा है। हालांकि, यह कदम तनाव कम करने में कितना प्रभावी होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल दोनों परिवारों की सबसे बड़ी चिंता उनके घरों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और सुरक्षित आवाजाही है। पानी तथा बिजली की आपूर्ति बाधित होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

कुसरा की घटना ने वेस्ट बैंक में कानून-व्यवस्था, बाशिंदा हिंसा और फलस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह अब इस बात पर है कि इजरायली सुरक्षा बल इलाके में तनाव को किस तरह नियंत्रित करते हैं और क्या दोनों फलस्तीनी परिवारों को उनके घरों में सुरक्षित रहने की स्थिति मिल पाती है।

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