Yamunotri Election 2027: हर चुनाव में बदला विधायक, अब 2027 में किसके पक्ष में जाएगा यमुनोत्री का जनादेश?

Yamunotri Election 2027 में एक बार फिर सबकी नजरें इस सीट पर हैं। 2002 से 2022 तक हर विधानसभा चुनाव में यहां विधायक बदला है। जानें यमुनोत्री का चुनावी इतिहास और

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों और नेताओं की सक्रियता बढ़ने लगी है। राज्य की निर्वाचन सूची में दूसरे नंबर पर दर्ज यमुनोत्री विधानसभा सीट इस लिहाज से बेहद खास मानी जाती है।

Election 2027: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यमुनोत्री सीट पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य गठन के बाद से इस विधानसभा क्षेत्र में हर चुनाव में विधायक बदलता रहा है। यही वजह है कि आगामी चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबले को लेकर अभी से अटकलें शुरू हो गई हैं।

यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र की राजनीति की खासियत यह रही है कि यहां मतदाताओं का रुझान केवल पार्टी के बजाय उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समीकरणों से भी प्रभावित होता रहा है। करीब 81 हजार मतदाताओं वाली इस सीट पर कई चुनावों में जीत का अंतर सीमित रहा है। ऐसे में 2027 में उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक गठजोड़ बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

यमुनोत्री में अब तक क्या रहा चुनावी इतिहास?

उत्तराखंड के गठन के बाद यमुनोत्री सीट पर अब तक पांच विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर बार नया विधायक चुना गया। 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के प्रीतम सिंह पंवार ने 9,498 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कांग्रेस के केदार सिंह रावत 7,013 वोट के साथ दूसरे और बीजेपी की सुलोचना 5,584 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

2007 में समीकरण बदला और कांग्रेस के केदार सिंह रावत ने 14,484 वोट के साथ जीत हासिल की। प्रीतम सिंह पंवार को 11,156 वोट मिले, जबकि बीजेपी की विमला देवी 6,283 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। 2012 में UKD ने फिर वापसी की। प्रीतम सिंह पंवार ने 15,909 वोट हासिल कर चुनाव जीता। कांग्रेस के केदार सिंह रावत 13,313 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बीजेपी के जगवीर सिंह को 11,961 वोट मिले।

2017 में बीजेपी के साथ आया बड़ा बदलाव

Yamunotri Election 2027: हर चुनाव में बदला विधायक, अब 2027 में किसके पक्ष में जाएगा यमुनोत्री का जनादेश?

2017 का चुनाव यमुनोत्री की राजनीति में अहम मोड़ साबित हुआ। 2007 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनने वाले केदार सिंह रावत ने पार्टी बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी के टिकट पर उन्होंने 19,800 वोट हासिल किए और विधायक बने। कांग्रेस ने संजय डोभाल को मैदान में उतारा, जिन्हें 13,840 वोट मिले।

वहीं, इस चुनाव में प्रीतम सिंह पंवार ने यमुनोत्री से चुनाव नहीं लड़ा और धनौल्टी विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। इसके परिणामस्वरूप यमुनोत्री में UKD का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और पार्टी को केवल 246 वोट मिले।

2022 में निर्दलीय संजय डोभाल ने पलटा खेल

2022 का विधानसभा चुनाव यमुनोत्री के अब तक के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में रहा। कांग्रेस ने 2017 के उम्मीदवार संजय डोभाल का टिकट काटकर दीपक बिजलवान को मैदान में उतारा। बीजेपी ने एक बार फिर केदार सिंह रावत पर भरोसा जताया। लेकिन दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ते हुए संजय डोभाल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे और 22,952 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वह वर्तमान में यमुनोत्री के विधायक हैं।

आगामी चुनाव से पहले संजय डोभाल और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच मुलाकातों तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत ने राजनीतिक चर्चा को बढ़ा दिया है। इन घटनाक्रमों को बीजेपी और डोभाल के बीच संभावित नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनकी अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

संभावना यह भी जताई जा रही है कि डोभाल बीजेपी में शामिल होकर पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं या फिर किसी तरह के समर्थन के साथ निर्दलीय उम्मीदवार बने रह सकते हैं।

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