यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब के पास स्थानीय बाजार पर सऊदी मिसाइल हमले का दावा किया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। इसी बीच ब्रिटेन ने हूती हमलों से बचाव के लिए सऊदी लड़ाकू विमानों को रक्षात्मक एयर-रिफ्यूलिंग सहायता देने की घोषणा की है।
सऊदी/यमन वॉर: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूती पक्ष ने दावा किया है कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास एक स्थानीय बाजार को सऊदी मिसाइल हमले में निशाना बनाया गया। हूतियों के मीडिया कार्यालय ने कथित हमले का CCTV वीडियो भी जारी किया है। हालांकि, हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सऊदी अरब की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब हूती लड़ाके यमन के लाल सागर तट से जुड़े रणनीतिक इलाकों में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और सऊदी अरब को ड्रोन तथा बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष का असर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
हूतियों ने बाजार पर मिसाइल हमले का दावा किया
हूती मीडिया कार्यालय के अनुसार, बाब अल-मंदेब के पास एक गांव के स्थानीय बाजार में सोमवार दोपहर करीब 12:14 बजे मिसाइल गिरी। जारी किए गए वीडियो में विस्फोट के बाद इलाके में धुआं और मलबा दिखाई देता है। हालांकि, इस कथित हमले में कितने लोग मारे गए या घायल हुए, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी सरकार की ओर से भी इस विशेष हमले की जिम्मेदारी स्वीकार किए जाने या घटना पर विस्तृत प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बाजार पर हमले को फिलहाल हूती पक्ष का दावा माना जा रहा है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित घटना।
यमन के राष्ट्रपति ने ट्रंप से मांगी मदद
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज होने के बीच राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, अल-अलीमी ने हूतियों के खिलाफ समर्थन की मांग की। हालांकि, अमेरिका की ओर से इस बातचीत के बाद सीधे सैन्य हस्तक्षेप या किसी नए सैन्य अभियान की प्रतिबद्धता सामने नहीं आई। अमेरिकी प्रशासन ने हाल के घटनाक्रम में हूतियों के खिलाफ सीधे हमले से दूरी बनाए रखी है।
यह स्थिति सऊदी अरब के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि रियाद यमन में हूती सैन्य बढ़त को अपनी सीमा और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती मानता है।
बाब अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। हूती नियंत्रण या हमलों का खतरा बढ़ने से समुद्री कंपनियां वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे यात्रा की दूरी, बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, बाब अल-मंदेब से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 12% व्यापार की आवाजाही होती है। हालिया संघर्ष में हूतियों ने लाल सागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण इलाकों और मोचा बंदरगाह के आसपास अपनी स्थिति मजबूत की है।
ब्रिटेन सऊदी अरब को देगा सीमित सैन्य सहायता
हूती हमलों के बीच ब्रिटेन ने सऊदी अरब के अनुरोध पर सीमित रक्षात्मक सैन्य सहायता देने का फैसला किया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने बताया कि रॉयल एयर फोर्स (RAF) का एक Voyager एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान सऊदी लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इस सहायता का उद्देश्य सऊदी विमानों को लंबे समय तक हवा में रहने और ड्रोन तथा मिसाइल हमलों के खिलाफ रक्षात्मक अभियान चलाने में सक्षम बनाना है। ब्रिटिश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मिशन हूती ठिकानों पर ब्रिटिश हमले के लिए नहीं, बल्कि सऊदी अरब की रक्षात्मक क्षमता को समर्थन देने के लिए है।

साइप्रस से संचालित हो सकता है RAF Voyager
ब्रिटेन का Voyager विमान साइप्रस स्थित RAF Akrotiri एयरबेस से क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विमान आने वाले दिनों में अभियान शुरू कर सकता है और इसकी तैनाती कई सप्ताह तक सीमित रखी जाएगी।
एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की मदद से लड़ाकू विमानों को बार-बार एयरबेस लौटने की जरूरत कम होती है। इससे वे ज्यादा समय तक गश्त कर सकते हैं और हवाई खतरों का जवाब देने के लिए अधिक समय तक हवा में बने रह सकते हैं। ब्रिटिश सरकार ने इस तैनाती को समय-सीमित और रक्षात्मक सहायता बताया है।
सऊदी अरब पर हूती हमले बढ़े
हाल के हफ्तों में हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का अभियान तेज किया है। रिपोर्टों के अनुसार, रियाद और देश के पश्चिमी हिस्से में ऊर्जा तथा सैन्य प्रतिष्ठान भी हमलों के निशाने पर रहे हैं।
सऊदी अरब की वायु रक्षा ने कई हमलों को रोकने का दावा किया है। वहीं हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश की है। रणनीतिक ऊंचाइयों पर नियंत्रण की लड़ाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन इलाकों से लाल सागर के तटीय क्षेत्र और बाब अल-मंदेब की ओर जाने वाले मार्गों पर निगरानी और सैन्य दबाव बढ़ाया जा सकता है।
हूतियों की बढ़त से लाल सागर में समुद्री सुरक्षा चिंता
हूती लड़ाकों की हालिया सैन्य गतिविधियों ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब की समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जहाजरानी कंपनियों के लिए यह मार्ग यूरोप और एशिया के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ने पर जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी 22 सितंबर को बातचीत के दौरान बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित तथा निर्बाध समुद्री आवाजाही के महत्व पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने यमन में संघर्षविराम और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
यमन में मानवीय संकट भी गहराया
सैन्य संघर्ष के दोबारा तेज होने का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में यमन के भीतर बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने और कुछ लोगों के लाल सागर पार कर अफ्रीका के जिबूती पहुंचने की जानकारी दी गई है।
द गार्जियन के अनुसार, हालिया लड़ाई में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और सैकड़ों लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में हताहतों और विस्थापन के आंकड़े अलग हो सकते हैं। संघर्ष के बढ़ने से पहले से गंभीर मानवीय संकट का दबाव और बढ़ सकता है। यमन लंबे समय से युद्ध, आर्थिक संकट और खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है।
ब्रिटेन पहले भी हूती ठिकानों पर कर चुका है कार्रवाई
ब्रिटेन का यमन संघर्ष में सैन्य समर्थन नया नहीं है। जनवरी 2024 में ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूती सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमलों के बाद की गई थी।
उस अभियान में RAF Typhoon लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया था और उन्हें Voyager विमानों के जरिए हवा में ईंधन दिया गया था। अब 2026 में ब्रिटेन ने जो नई सहायता घोषित की है, वह उससे अलग है। इस बार लंदन ने इसे रक्षात्मक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग समर्थन के रूप में परिभाषित किया है और सीधे हूती ठिकानों पर ब्रिटिश हमले की घोषणा नहीं की है।
जिबूती संघर्ष में शामिल होने से बचना चाहता है
बाब अल-मंदेब के दूसरी ओर अफ्रीकी देश जिबूती स्थित है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद जिबूती ने यमन के संघर्ष में सीधे शामिल होने से दूरी बनाए रखने की इच्छा जताई है। हालांकि, जिबूती का सामरिक महत्व बहुत अधिक है। यहां अमेरिका सहित कई देशों की सैन्य मौजूदगी है और बाब अल-मंदेब की सुरक्षा के लिहाज से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जाता है। लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित होने के कारण यमन में संघर्ष बढ़ने की स्थिति में जिबूती पर भी सुरक्षा और मानवीय दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या है चुनौती?
यमन में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच संघर्ष का नया चरण अब केवल घरेलू युद्ध तक सीमित नहीं रह गया है। बाब अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा, सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले, अमेरिकी नीति और ब्रिटेन की सीमित सैन्य सहायता ने इसे व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दा बना दिया है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष को लाल सागर की समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर और अधिक असर डालने से रोकना है। ब्रिटेन ने रक्षात्मक समर्थन की समय-सीमा सीमित रखी है, जबकि अमेरिका ने प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों में हूती सैन्य गतिविधियों और सऊदी प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।











