ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच तेल कीमतें बढ़ीं और अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं।
ईरान/अमेरिका वॉर: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर जवाबी हमला किया जाएगा।
IRGC की नौसेना शाखा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ईरान अपनी समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। वहीं, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन पहले ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब केवल अंतिम आदेश का इंतजार है।
अमेरिका के 14-पॉइंट प्रस्ताव पर ईरान का जवाब लंबित
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही और परमाणु गतिविधियों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, ईरान ने अब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि प्रस्ताव अभी समीक्षा प्रक्रिया में है और उचित समय पर इसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी बाहरी समय सीमा के दबाव में निर्णय नहीं लेगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव की समीक्षा ईरानी संसद, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और IRGC समेत कई महत्वपूर्ण संस्थाएं कर रही हैं। अंतिम मंजूरी ईरान के सर्वोच्च नेता के स्तर पर दी जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट इस समय अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन चुका है। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है।
ब्रिटेन ने क्षेत्र में अपने युद्धपोत HMS Dragon को भेजने की घोषणा की है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा अभियान की तैयारी करना है, ताकि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

फ्रांस भी दक्षिणी लाल सागर में अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर चुका है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यूरोपीय देश भी इस संकट को लेकर गंभीर हैं।
रूस ने दिया ईरान को समर्थन का संकेत
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि रूस, ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है। मॉस्को में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुतिन ने बताया कि 2015 में भी रूस ने इस तरह की भूमिका निभाई थी और जरूरत पड़ने पर दोबारा ऐसा किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के सख्त रुख के कारण पहले हुए समझौते कमजोर पड़े और इसके बाद ईरान ने भी अपनी नीति कठोर कर ली।
लेबनान में इजराइली हमले तेज, 39 लोगों की मौत
इस बीच, Lebanon में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष और तेज हो गया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी इलाकों में इजराइली हवाई और ड्रोन हमलों में एक दिन में 39 लोगों की मौत हुई है। कई रिहायशी इमारतें भी प्रभावित हुई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष अब केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ रहा है।
तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र और आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तनाव और बढ़ा, तो ईंधन, खाद्य पदार्थों और आयातित वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशियाई देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि ये देश ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं।
नाविकों पर बढ़ा मानसिक दबाव
समुद्री संगठनों ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में हजारों नाविक लंबे समय से तनावपूर्ण परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के बीच काम कर रहे कर्मचारियों में मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान अब तक कम से कम 11 नाविकों की मौत हो चुकी है।











