Hepatitis Alert: बिन लक्षण लिवर को नुकसान, एक्सपर्ट बताते हैं जरूरी बातें

भारत में Hepatitis B और C से लाखों प्रभावित। जानें लक्षण, संक्रमण के कारण, जोखिम और समय पर जांच व इलाज की अहमियत।

भारत में लाखों लोग हेपेटाइटिस बी और सी के साथ जी रहे हैं, लेकिन ज्यादातर को इसका पता नहीं होता। यह वायरस बिना लक्षण के लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, जिससे सिरोसिस, लिवर फेल्योर और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। समय पर जांच और इलाज इसे नियंत्रित करने का सबसे असरदार तरीका है।

Hepatitis in India: भारत में हेपेटाइटिस बी और सी का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जहां करोड़ों लोग बिना लक्षण के वायरस के प्रभाव में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह मुख्य रूप से असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित खून, टैटू या पियर्सिंग और गर्भावस्था के दौरान फैल सकता है। सही समय पर जांच और इलाज न मिलने पर यह लिवर सिरोसिस, फेल्योर और कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों तक पहुंचा सकता है। जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाय है।

बिना लक्षण कैसे नुकसान पहुंचाता है हेपेटाइटिस?

हेपेटाइटिस बी और सी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में सक्रिय रहते हैं। मरीज सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर डैमेज होता रहता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक थकान, पीलिया या पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं, तब तक कई मामलों में लिवर को गंभीर नुकसान हो चुका होता है। यही वजह है कि समय पर जांच और स्क्रीनिंग बेहद जरूरी मानी जाती है।

संक्रमण के कारण और फैलने के तरीके

हेपेटाइटिस बी और सी मुख्य रूप से संक्रमित खून या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। असुरक्षित इंजेक्शन, बिना जांचे गए ब्लड ट्रांसफ्यूजन, संक्रमित सुई से टैटू या पियर्सिंग और असुरक्षित मेडिकल प्रक्रियाएं इसके प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा, यह संक्रमण गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे में भी जा सकता है। हालांकि, सामान्य संपर्क जैसे साथ खाना खाना, गले मिलना या खांसने से यह बीमारी नहीं फैलती, जिसे लेकर लोगों में अक्सर गलतफहमी रहती है।

भारत में स्थिति और इलाज की संभावना

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत की 3-4 प्रतिशत आबादी हेपेटाइटिस बी और 0.5 से 1 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस सी से प्रभावित हैं। यह संख्या करोड़ों में है, जो चिंता का विषय है।

हालांकि राहत की बात यह है कि हेपेटाइटिस सी का इलाज अब संभव है और कुछ हफ्तों की दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है। वहीं हेपेटाइटिस बी के मामलों में लंबे समय तक उपचार और निगरानी की जरूरत होती है।

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