सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में हिमालयन ग्रुप के चेयरमैन रजनीश बंसल की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने ईडी की दलीलों को स्वीकार करते हुए हिरासत में पूछताछ को जरूरी माना है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के चर्चित 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल को हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता और मनी ट्रेल की जांच के लिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाई कोर्ट का फैसला
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अपील स्वीकार करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
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जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि गंभीर आर्थिक अपराधों में जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जांच की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दिया गया है और इससे आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं मानी जानी चाहिए।
ED ने हिरासत में पूछताछ की बताई जरूरत
सुनवाई के दौरान ED ने अदालत को बताया कि यह मामला अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
एजेंसी का कहना था कि आरोपित से हिरासत में पूछताछ किए बिना धन के प्रवाह (Money Trail) और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाना संभव नहीं होगा। ED ने यह भी दलील दी कि अग्रिम जमानत मिलने के कारण जांच प्रभावित हो रही थी और कई महत्वपूर्ण तथ्यों तक पहुंचने में कठिनाई आ रही थी।
क्या है 250 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला?
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर SC, ST और OBC वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
आरोप है कि वर्ष 2012-13 से 2017-18 के बीच हिमाचल प्रदेश के कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी प्रवेश, कथित जाली दस्तावेज और अन्य अनियमित तरीकों का इस्तेमाल कर छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त की। जांच में सरकारी खजाने को करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई। इस मामले में 22 से अधिक निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी।
हाई कोर्ट के आदेश पर हुई थी CBI जांच
वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया था। CBI ने जांच के बाद कई निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों, अधिकारियों और अन्य आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए।
CBI जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अलग से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसी जांच के दौरान ED ने रजनीश बंसल को मिली अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब अदालत ने रद्द कर दिया है।
जांच को मिल सकती है नई गति
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसियों को मामले की आगे की जांच में मदद मिलने की संभावना है। हिरासत में पूछताछ के जरिए ED धन के प्रवाह, कथित फर्जी लेनदेन और छात्रवृत्ति राशि के उपयोग से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच करेगी। यह मामला हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा और वित्तीय घोटालों में शामिल माना जाता है और आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।









