इंडोनेशिया की राष्ट्रीय पोषण एजेंसी प्रमुख ने दिया इस्तीफा, मुफ्त भोजन योजना पर फिर उठे सवाल

इंडोनेशिया की राष्ट्रीय पोषण एजेंसी प्रमुख नैनिक सुदरयाती डेयांग ने स्वास्थ्य और तनाव का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। फ्री मील योजना फिर विवादों में है।

इंडोनेशिया की राष्ट्रीय पोषण एजेंसी प्रमुख नैनिक सुदरयाती डेयांग ने स्वास्थ्य और अत्यधिक तनाव का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। यह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की महत्वाकांक्षी मुफ्त भोजन योजना में हाल के हफ्तों में दूसरा बड़ा नेतृत्व परिवर्तन है।

जकार्ता: इंडोनेशिया की राष्ट्रीय पोषण एजेंसी (National Nutrition Agency - NNA) की प्रमुख नैनिक सुदरयाती डेयांग ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अत्यधिक मानसिक तनाव का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की महत्वाकांक्षी मुफ्त भोजन योजना पहले से ही बजट कटौती, प्रशासनिक चुनौतियों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। यह पिछले कुछ ही सप्ताहों में एजेंसी के शीर्ष नेतृत्व में दूसरा बड़ा बदलाव है, जिससे सरकार की इस प्रमुख सामाजिक कल्याण योजना पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी जानकारी

नैनिक सुदरयाती डेयांग ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में बताया कि उन्हें हृदय संबंधी उपचार के लिए विदेश जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दी है कि लगातार तनाव के कारण उनकी धमनियों में गंभीर अवरोध उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने अपने संदेश में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया। नैनिक ने यह भी संकेत दिया कि सरकार राष्ट्रीय पोषण एजेंसी के लिए एक पर्यवेक्षण (सुपरवाइजरी) बोर्ड गठित करने पर विचार कर रही है और उन्हें इस प्रस्तावित बोर्ड का नेतृत्व करने के लिए कहा गया है।

हाल के महीनों में लगातार विवादों में रही योजना

इंडोनेशिया की मुफ्त भोजन योजना जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य देशभर के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। यह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के चुनावी घोषणापत्र का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे महंगा वादा माना जाता है।

हालांकि योजना शुरू होने के बाद से इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। विभिन्न क्षेत्रों में भोजन की गुणवत्ता, आपूर्ति व्यवस्था, वितरण प्रणाली और लॉजिस्टिक प्रबंधन को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ स्थानों पर सामूहिक फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) की घटनाओं ने भी इस योजना पर गंभीर सवाल खड़े किए।

पूर्व प्रमुख की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा दबाव

नैनिक सुदरयाती डेयांग ने जून में राष्ट्रीय पोषण एजेंसी का नेतृत्व संभाला था। उनसे पहले एजेंसी के प्रमुख को राष्ट्रपति ने पद से हटा दिया था। बाद में उन्हें इसी बहु-अरब डॉलर की योजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों ने एजेंसी के कार्यालय पर छापेमारी भी की थी, जिसके बाद पूरे कार्यक्रम की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई। इन घटनाओं के कारण एजेंसी पर लगातार प्रशासनिक और सार्वजनिक दबाव बना हुआ था।

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बजट में दूसरी बार बड़ी कटौती

नैनिक के इस्तीफे से एक दिन पहले ही राष्ट्रीय पोषण एजेंसी ने जानकारी दी थी कि वर्ष 2026 के लिए योजना का बजट दूसरी बार कम किया गया है। पहले इस योजना के लिए 268 ट्रिलियन इंडोनेशियाई रुपिया का बजट प्रस्तावित था, जिसे घटाकर 229 ट्रिलियन रुपिया (लगभग 12.79 अरब अमेरिकी डॉलर) कर दिया गया। इससे पहले प्रारंभिक बजट 335 ट्रिलियन रुपिया निर्धारित किया गया था। इस तरह अब कुल आवंटन प्रारंभिक प्रस्ताव की तुलना में 100 ट्रिलियन रुपिया से भी अधिक कम हो चुका है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि भविष्य में वित्तीय समीक्षा के आधार पर बजट में और कटौती भी संभव है।

करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का था लक्ष्य

सरकार ने इस योजना के माध्यम से लगभग 8.3 करोड़ लोगों तक मुफ्त पौष्टिक भोजन पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। इसमें मुख्य रूप से स्कूली बच्चे, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय पोषण एजेंसी के अनुसार अब तक लगभग 6.25 करोड़ लोगों को इस योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। हालांकि बजट में कटौती और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण भविष्य में इस लक्ष्य को निर्धारित समय के भीतर पूरा करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सरकार के लिए अहम राजनीतिक परियोजना

मुफ्त भोजन कार्यक्रम राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याण योजनाओं में से एक है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण कम करना, शिक्षा में सुधार लाना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। वहीं आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े स्तर की योजना के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचा, वित्तीय पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि इन पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो योजना की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।

नए प्रमुख की नियुक्ति पर नजर

फिलहाल सरकार ने राष्ट्रीय पोषण एजेंसी के नए प्रमुख की औपचारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि नैनिक सुदरयाती डेयांग ने संकेत दिया है कि उनकी जगह एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती योजना की विश्वसनीयता बहाल करना, बजट सीमाओं के बीच कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करना और जनता का विश्वास बनाए रखना होगा।

आगे क्या?

राष्ट्रीय पोषण एजेंसी में लगातार नेतृत्व परिवर्तन, भ्रष्टाचार जांच, बजट में कटौती और संचालन संबंधी चुनौतियों ने इंडोनेशिया की मुफ्त भोजन योजना को कठिन दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले महीनों में सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को पारदर्शी, प्रभावी और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने की होगी। साथ ही नए नेतृत्व की नियुक्ति और प्रशासनिक सुधार यह तय करेंगे कि यह योजना अपने मूल उद्देश्य—बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने—में कितनी सफल हो पाती है।

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