केन्या में इबोला सुविधा पर काम बंद: अदालत की फटकार के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने निर्माण कार्य बंद कराया

केन्या के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने अदालत की फटकार के बाद अमेरिकी फंड से बन रहे इबोला क्वारंटीन सेंटर का निर्माण रोक दिया। विरोध और कानूनी विवाद जारी है।

केन्या में अमेरिकी सहायता से बन रहे इबोला क्वारंटीन सेंटर का निर्माण अदालत के आदेश के बाद रोक दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने माफी मांगते हुए काम बंद करने का निर्देश दिया, जबकि स्थानीय लोग और अधिकार समूह परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

 नैरोबी: पूर्वी अफ्रीका के प्रमुख देश केन्या में अमेरिकी सहायता से बनाए जा रहे एक विवादास्पद इबोला क्वारंटीन सेंटर को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है। केन्या के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने देश के नान्युकी क्षेत्र में बन रहे इस केंद्र के निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है। यह फैसला उस समय सामने आया जब एक दिन पहले अदालत ने मंत्री को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया था।

यह क्वारंटीन सुविधा मुख्य रूप से उन अमेरिकी नागरिकों के लिए बनाई जा रही थी, जिनके इबोला वायरस से संक्रमित होने की आशंका हो सकती है। हालांकि स्थानीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और चिकित्सा संघों ने इस परियोजना का लगातार विरोध किया है। नया घटनाक्रम केन्या में सार्वजनिक स्वास्थ्य, राष्ट्रीय संप्रभुता, विदेशी सहयोग और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर व्यापक बहस का कारण बन गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अदालत से मांगी माफी

मंगलवार को अदालत में पेश हुए स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुआले ने न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को तुरंत रोकने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

मंत्री ने अदालत के समक्ष कहा कि यदि उनके किसी कदम, गलतफहमी या प्रशासनिक चूक के कारण अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ है या ऐसा प्रतीत हुआ है, तो उन्हें इसका गहरा खेद है।

केन्या की हाई कोर्ट की न्यायाधीश पेट्रिशिया न्याउंडी ने मंत्री की माफी स्वीकार करते हुए उन्हें कड़ी चेतावनी के साथ राहत प्रदान की। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों का पालन करना प्रत्येक सरकारी अधिकारी की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब केन्या के नान्युकी स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे के परिसर में 50 बिस्तरों वाला इबोला क्वारंटीन केंद्र बनाने की योजना सामने आई।

इस केंद्र के निर्माण को अमेरिकी वित्तीय सहायता प्राप्त थी और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में फैल रहे इबोला प्रकोप के दौरान संभावित संक्रमित अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित अलगाव में रखना था।

मई 2026 में मानवाधिकार संगठन कटिबा इंस्टीट्यूट ने इस परियोजना के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। संगठन का तर्क था कि यह व्यवस्था केन्या की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि मामले की पूरी सुनवाई होने तक निर्माण कार्य रोक दिया जाए।

अदालत की अवमानना का मामला कैसे बना?

हालांकि अदालत के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की खबरें सामने आईं। इसके बाद न्यायालय ने मामले की समीक्षा की और पाया कि परियोजना स्थल पर गतिविधियां जारी थीं।

अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी आदेश की भाषा को अपने हिसाब से बदलकर या उसकी नई व्याख्या करके न्यायालय के निर्देशों से बच नहीं सकते।

न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि अदालत का आदेश कोई सुझाव नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी निर्देश होता है जिसका पालन अनिवार्य है।

अदालत के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री को यह पूरी तरह मालूम था कि नान्युकी परियोजना से संबंधित सभी निर्माण गतिविधियां रोकनी थीं, फिर भी काम जारी रहने दिया गया।

उपग्रह तस्वीरों ने बढ़ाया विवाद

मामले को और गंभीर तब माना गया जब स्वतंत्र विश्लेषण में सामने आया कि जून के दौरान परियोजना स्थल पर निर्माण गतिविधियां तेज हुई थीं।

उपग्रह तस्वीरों में अतिरिक्त टेंट लगाए जाने, नई सड़कों के निर्माण, भूमि समतलीकरण और अन्य संरचनात्मक विकास के संकेत दिखाई दिए। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि अदालत के आदेश के बावजूद काम जारी था।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए निर्माण गतिविधियों को आदेश उल्लंघन माना।

स्थानीय लोगों का विरोध और हिंसक प्रदर्शन

नान्युकी क्षेत्र में इस परियोजना के खिलाफ कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इबोला जैसी घातक बीमारी से जुड़े केंद्र को उनके क्षेत्र में स्थापित करना सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण हो सकता है।

विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़पें हुईं। इन घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

मृतकों में 17 वर्षीय छात्र सिल्वेस्टर मुइगाई नदुंगू भी शामिल था। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि उसे सिर में गोली लगी थी, हालांकि पुलिस ने कहा है कि मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

इन घटनाओं ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है तथा पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

सरकार का पक्ष: वैज्ञानिक आधार पर लिया गया फैसला

स्वास्थ्य मंत्री डुआले ने अदालत में कहा कि सरकार के सभी निर्णय वैज्ञानिक तथ्यों, तकनीकी सलाह और स्वास्थ्य सुरक्षा रणनीतियों के आधार पर लिए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि क्वारंटीन केंद्र से आसपास की आबादी को इबोला संक्रमण फैलने की आशंका वैज्ञानिक रूप से निराधार है।

मंत्री के अनुसार यह सुविधा एक सुरक्षित सैन्य हवाई अड्डे के परिसर में बनाई जा रही थी, जहां कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं और आम नागरिकों की पहुंच बेहद सीमित है।

सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और संभावित आपदाओं के लिए तैयारी करना है।

राष्ट्रपति रूटो ने भी किया समर्थन

केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने भी इस परियोजना का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने केन्या से मानवीय सहयोग की अपील की थी और ऐसी स्थिति में सहायता से इनकार करना अमानवीय कदम होता।

राष्ट्रपति ने राजनीतिक दलों और नेताओं से भी अपील की कि वे इबोला जैसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे का राजनीतिकरण न करें और जिम्मेदारीपूर्ण बयान दें।

केन्याई मेडिकल समुदाय की चिंता

परियोजना का सबसे मुखर विरोध केन्या मेडिकल प्रैक्टिशनर्स, फार्मासिस्ट्स एंड डेंटिस्ट्स यूनियन (KMPDU) ने किया है।

संघ का सवाल है कि अमेरिकी नागरिकों के लिए क्वारंटीन सुविधा स्थापित करने हेतु केन्या को ही क्यों चुना गया। संगठन का कहना है कि देश को किसी विदेशी स्वास्थ्य संकट के लिए "कंटेनमेंट कॉलोनी" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में विदेशी हितों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।

क्षेत्रीय इबोला संकट और अमेरिकी सहायता

वर्तमान में इबोला का सबसे गंभीर प्रकोप लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में दर्ज किया गया है, जहां एक हजार से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं।

पड़ोसी युगांडा में भी कई संक्रमण मामलों की पुष्टि हुई है। हालांकि केन्या में अब तक कोई आधिकारिक इबोला मामला दर्ज नहीं किया गया है।

अमेरिका ने क्षेत्रीय इबोला प्रतिक्रिया कार्यक्रम के तहत कुल 112 मिलियन डॉलर की सहायता का वादा किया है। इसमें से लगभग 13.5 मिलियन डॉलर केन्या की स्वास्थ्य तैयारियों और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए निर्धारित किए गए हैं।

Leave a comment