क्यों लगातार AI का इस्तेमाल दिमाग को कर सकता है कमजोर, जानें एक्सपर्ट्स की राय

अध्ययन में पाया गया कि लगातार AI टूल्स इस्तेमाल करने से सोचने और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं सीमित और सहायक उपयोग।

नई रिसर्च में सामने आया है कि AI (Artificial Intelligence) पर बढ़ती निर्भरता युवाओं के मस्तिष्क पर नकारात्मक असर डाल सकती है। लगातार AI टूल्स का इस्तेमाल सोचने, निर्णय लेने और क्रिएटिविटी की क्षमता को कमजोर करता है। खुद से काम करने वाले छात्रों में दिमागी सक्रियता और भावनात्मक जुड़ाव बेहतर पाया गया। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI को सहायक टूल की तरह ही इस्तेमाल किया जाए।

AI effect on brain: हालिया शोध में यह पता चला है कि युवाओं का लगातार AI टूल्स पर भरोसा मस्तिष्क की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर रहा है। अमेरिका में 18-19 साल के छात्रों पर की गई स्टडी में ChatGPT और Google AI इस्तेमाल करने वाले छात्रों में दिमागी सक्रियता कम पाई गई। वहीं, बिना किसी टूल के खुद से निबंध लिखने वाले छात्रों की मानसिक गतिविधि और भावनात्मक जुड़ाव सबसे बेहतर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि AI को हर काम के विकल्प के रूप में न अपनाकर सीमित और सहायक रूप में इस्तेमाल करना जरूरी है।

AI पर बढ़ती निर्भरता क्यों बन रही है खतरा

AI effect on brain को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि लोग अब पढ़ाई, ऑफिस वर्क और निजी समस्याओं तक के लिए AI पर भरोसा करने लगे हैं। इससे दिमाग को खुद सोचने और समाधान खोजने का मौका कम मिल रहा है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब दिमाग को लगातार रेडीमेड जवाब मिलते हैं, तो उसकी नैचुरल क्रिएटिविटी और निर्णय लेने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

स्टडी में क्या निकले चौंकाने वाले नतीजे

एक रिसर्च में 18 से 19 साल के युवाओं को तीन ग्रुप में बांटकर निबंध लिखवाए गए। एक ग्रुप ने ChatGPT, दूसरे ने Google AI और तीसरे ने बिना किसी टूल के खुद से लिखा। EEG हेडसेट से दिमागी गतिविधि मापी गई।
नतीजों में पाया गया कि AI टूल्स इस्तेमाल करने वाले छात्रों में दिमागी सक्रियता कम थी। उनके लेखन में भावनात्मक गहराई और सोच की स्पष्टता भी कमजोर नजर आई, जबकि खुद से लिखने वाले छात्रों का मानसिक जुड़ाव सबसे बेहतर रहा।

युवाओं पर ज्यादा असर की चेतावनी

वैज्ञानिकों का मानना है कि दिमाग के विकास के शुरुआती दौर में AI पर ज्यादा निर्भरता याददाश्त और सोचने की शक्ति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है। जो युवा लगातार AI से काम कराते हैं, उनमें मानसिक गतिविधि कम होती जा रही है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI को सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करें, न कि हर समस्या का विकल्प बनाएं, ताकि दिमाग की प्राकृतिक क्षमता बनी रहे।

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