MP हाईकोर्ट ने दहेज मामले में रिश्तेदारों पर दर्ज FIR रद्द की, बेवजह फंसाने पर जताई चिंता

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में पति के रिश्तेदारों पर बिना ठोस सबूत दर्ज FIR रद्द की, पति के खिलाफ सुनवाई जारी रहेगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में पति के रिश्तेदारों को बिना ठोस सबूत आरोपी बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी, जबकि पति के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।

Jabalpur: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामलों में पति के परिवार वालों को बेवजह फंसाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोप कानून के दुरुपयोग की श्रेणी में आते हैं। इसी आधार पर अदालत ने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया, जबकि पति के खिलाफ केस जारी रहेगा।

दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों में पति के रिश्तेदारों को बिना पर्याप्त आधार आरोपी बनाए जाने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में पूरे परिवार को घसीटना चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है और ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी कार्रवाई रद्द कर दी, जबकि पति के खिलाफ केस जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

रिश्तेदारों पर आरोपों को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, किसी भी आपराधिक कार्रवाई के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट भूमिका होना जरूरी है।

अदालत ने माना कि कई वैवाहिक विवादों में पति के साथ उसके माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों को भी नामजद कर दिया जाता है, जबकि उनके खिलाफ प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होते। ऐसे मामलों में न्यायिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

शादी के बाद बढ़ा विवाद

याचिका के अनुसार, विदिशा निवासी शुभम साहू की शादी वर्ष 2022 में सागर निवासी निधि से हुई थी। कुछ समय बाद पत्नी की तबीयत खराब रहने लगी और वह मायके चली गई। बाद में उसके लापता होने की बात भी सामने आई।

पति पक्ष का कहना था कि जुलाई 2025 में तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया, जिसमें परिवार के अन्य सदस्यों को भी आरोपी बना दिया गया।

पति के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा

हाईकोर्ट ने साफ किया कि रिश्तेदारों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए उनके खिलाफ FIR निरस्त की जाती है। हालांकि, पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।

कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को अहम मान रहे हैं, क्योंकि यह उन मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है जहां पारिवारिक विवादों के दौरान आरोपों का दायरा जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिया जाता है।

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