पटना में बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, बढ़ता तनाव और पर्याप्त नींद नहीं लेने का असर अब युवाओं की त्वचा और बालों पर भी दिखाई दे रहा है। पीएमसीएच की ओपीडी में 18 से 22 वर्ष की उम्र के युवाओं में बाल झड़ने की शिकायत अधिक देखने को मिल रही है। इसके साथ ही बारिश और बाढ़ के कारण वातावरण में बढ़ी उमस और नमी से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। दाद, खुजली, लाल चकत्ते, जलन, फंगल संक्रमण और चेहरे पर मुहांसों जैसी परेशानियां युवाओं में देखने को मिल रही हैं।
पीएमसीएच के त्वचा रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार झा ने दैनिक जागरण के 'हेलो जागरण' कार्यक्रम में त्वचा और बालों से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने खास तौर पर इस बात की सलाह दी कि बाल झड़ने, दाद, खुजली, चेहरे के दाग या किसी भी त्वचा संबंधी समस्या में इंटरनेट, सोशल मीडिया या परिचितों की सलाह पर खुद से क्रीम, दवा या सप्लीमेंट शुरू नहीं करना चाहिए। समस्या का सही कारण पता लगाना जरूरी है, क्योंकि एक जैसे दिखने वाले लक्षण अलग-अलग बीमारियों की वजह से हो सकते हैं।
युवाओं में बाल झड़ने की समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि इसके पीछे तनाव, नींद की कमी, खान-पान में अनियमितता, पर्याप्त पोषण नहीं मिलना और बदलती दिनचर्या जैसे कई कारण भूमिका निभा सकते हैं। कम उम्र में बालों का लगातार और अधिक गिरना केवल शैंपू या तेल की समस्या नहीं माना जा सकता। यदि सामान्य से ज्यादा बाल गिर रहे हैं या समस्या लगातार बनी हुई है तो इसके कारण की चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या बालों के साथ-साथ त्वचा की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आजकल युवाओं की दिनचर्या में देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, पढ़ाई या नौकरी का तनाव, समय पर भोजन नहीं करना और नींद का पूरा न होना आम बात हो गई है। ऐसी आदतों का असर शरीर पर अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है। डॉक्टर के अनुसार बाल झड़ने की शिकायत होने पर केवल बाहर से लगाए जाने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी दिनचर्या और खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि बाल झड़ने की समस्या ज्यादा है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर कारण की पहचान कराना बेहतर है।
पटना में इस समय उमस और नमी के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। बारिश और बाढ़ के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से शरीर की सिलवटों वाले हिस्सों में फंगल संक्रमण की परेशानी हो सकती है। इसके कारण खुजली, लाल चकत्ते, जलन और दाद जैसी समस्या सामने आ सकती है। ऐसी स्थिति में प्रभावित हिस्से को साफ और सूखा रखना जरूरी है। बार-बार खुजलाने से त्वचा को नुकसान हो सकता है और समस्या बढ़ सकती है।
डॉक्टर ने खास तौर पर स्टेरायडयुक्त मिश्रित क्रीम के मनमाने इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। कई बार त्वचा पर लाल चकत्ता या खुजली होने पर लोग मेडिकल स्टोर से कोई भी क्रीम खरीदकर लगा लेते हैं। इससे कुछ समय के लिए लक्षण दब सकते हैं, लेकिन बीमारी का सही कारण खत्म नहीं होता और कुछ मामलों में संक्रमण बढ़ भी सकता है। इसलिए दाद या खुजली की समस्या बार-बार हो रही हो, फैल रही हो या लंबे समय तक बनी हुई हो तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
चेहरे पर काले दाग और मुहांसों की समस्या भी युवाओं में आम है। चेहरे पर दिखाई देने वाले काले निशान कई कारणों से हो सकते हैं। मुहांसों के बाद बने निशान, धूप का अधिक प्रभाव या हार्मोनल कारण इसके पीछे हो सकते हैं। इसलिए केवल दाग देखकर कोई क्रीम या ब्लीचिंग उत्पाद इस्तेमाल करना उचित नहीं है। डॉक्टर ने सलाह दी है कि पहले दाग का कारण समझना जरूरी है। धूप से बचाव के लिए नियमित रूप से सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि लंबे समय से बने दाग के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
चेहरे पर अतिरिक्त तेल की वजह से मुहांसों की शिकायत भी युवाओं में देखने को मिल रही है। इस स्थिति में चेहरे पर बार-बार अलग-अलग उत्पाद लगाने के बजाय त्वचा की प्रकृति के अनुसार देखभाल जरूरी है। बाजार में उपलब्ध हर क्रीम या फेस प्रोडक्ट हर व्यक्ति की त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं होता। किसी उत्पाद से जलन, लालिमा या समस्या बढ़ने लगे तो उसका इस्तेमाल रोककर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
सिर की त्वचा से जुड़ी समस्या में डैंड्रफ भी बड़ी परेशानी बन रही है। डैंड्रफ होने पर नियमित रूप से एंटी-डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल किया जा सकता है और सिर की त्वचा को साफ रखना जरूरी है। हालांकि बहुत ज्यादा तेल लगाने या लंबे समय तक सिर में तेल लगा छोड़ने से समस्या बढ़ सकती है। यदि डैंड्रफ के साथ लगातार खुजली, लालिमा या घाव भी हो रहे हैं तो इसे केवल सामान्य रूसी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
सिर की त्वचा में खुजली और बालों की जड़ों में संक्रमण यानी फालिकुलाइटिस की समस्या भी मरीजों में सामने आ रही है। इसमें बालों की जड़ों के आसपास परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बिना जांच के कोई दवा या क्रीम इस्तेमाल करना सही नहीं है। समस्या का कारण अलग-अलग हो सकता है और उसी के अनुसार उपचार की जरूरत पड़ती है। इसलिए लगातार खुजली, लालिमा, छोटे दाने या घाव होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
पैरों में दाद या फंगल संक्रमण होने पर भी लोग अक्सर घरेलू उपचार या बाजार में मिलने वाली क्रीम का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। डॉक्टर ने ऐसे मामलों में पैरों को सूखा रखने की सलाह दी है। रोजाना मोजे बदलना और संक्रमित हिस्से को खुजलाने से बचना भी जरूरी है। तौलिया, कपड़े और जूते-मोजे दूसरे लोगों के साथ साझा नहीं करने चाहिए, क्योंकि फंगल संक्रमण फैल सकता है। यदि समस्या बनी रहती है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से उपचार कराना बेहतर है।
त्वचा पर लाल चकत्ते होने की स्थिति में भी पहले उसका कारण समझना जरूरी है। लाल चकत्ते केवल फंगल संक्रमण के कारण नहीं होते, बल्कि एलर्जी या दूसरी त्वचा संबंधी समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी लाल चकत्ते को देखकर तुरंत कोई क्रीम लगा लेना उचित नहीं है। प्रभावित स्थान को साफ और सूखा रखने के साथ-साथ उसे बार-बार खुजलाने से बचना चाहिए। यदि चकत्ते फैल रहे हैं या बार-बार हो रहे हैं तो विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
इसी तरह शरीर के किसी हिस्से पर धब्बा बनने पर उसके रंग, आकार, किनारे और उसके बने रहने की अवधि पर ध्यान देना जरूरी है। यदि धब्बा लगातार बढ़ रहा है, उसमें खुजली हो रही है या उसका रंग बदल रहा है तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। बिना कारण जाने किसी क्रीम या दवा का इस्तेमाल करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
डॉक्टर की सलाह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि त्वचा और बालों से जुड़ी समस्याओं में खुद से इलाज शुरू करने की आदत से बचना चाहिए। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बाल झड़ने या त्वचा की समस्या के लिए कई तरह के घरेलू उपाय, सप्लीमेंट और क्रीम बताए जाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की समस्या का कारण एक जैसा नहीं होता। किसी दूसरे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाला उत्पाद जरूरी नहीं कि दूसरे व्यक्ति के लिए भी उपयुक्त हो।
बाल झड़ने की समस्या होने पर भी लोग तुरंत हेयर ऑयल, सप्लीमेंट या अलग-अलग शैंपू बदलना शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर बाल झड़ने के पीछे तनाव, पोषण की कमी, नींद की समस्या या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण है तो केवल बाहरी उत्पाद बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसलिए लगातार बाल गिरने की स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श लेकर सही कारण का पता लगाना महत्वपूर्ण है।
त्वचा की देखभाल के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है। शरीर को साफ और सूखा रखना, खासकर उमस के मौसम में पसीने वाले हिस्सों की स्वच्छता बनाए रखना, गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। पैरों में फंगल संक्रमण की आशंका होने पर जूते-मोजे भी सूखे रखना जरूरी है।
उमस के मौसम में शरीर की सिलवटों में पसीना और नमी ज्यादा समय तक रहने से परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए ऐसे हिस्सों की सफाई और उन्हें सूखा रखना महत्वपूर्ण है। यदि खुजली या दाद हो गई है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।
युवाओं के लिए बाल और त्वचा की समस्या से बचने के लिहाज से नियमित दिनचर्या सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश शरीर की सामान्य सेहत के लिए जरूरी है। हालांकि किसी बीमारी का इलाज केवल जीवनशैली में बदलाव से हो जाएगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि त्वचा पर किसी तरह की समस्या होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के स्टेरायड वाली मिश्रित क्रीम नहीं लगानी चाहिए। इसी तरह चेहरे के दाग-धब्बों के लिए फेयरनेस या ब्लीचिंग क्रीम का मनमाना इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। दाद, खुजली, लाल चकत्ते, मुहांसे या धब्बे के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं और सही उपचार कारण की पहचान के बाद ही तय किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर पीएमसीएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह का फोकस इस बात पर है कि युवाओं को बाल और त्वचा की समस्याओं को केवल सौंदर्य से जुड़ी परेशानी मानकर खुद से उपचार नहीं करना चाहिए। खासकर 18 से 22 वर्ष की उम्र में बाल झड़ने की शिकायत लगातार बढ़ रही हो तो अपनी दिनचर्या, नींद और खान-पान पर ध्यान देने के साथ चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। वहीं पटना में उमस और नमी के बीच दाद, फंगल संक्रमण और खुजली जैसी समस्या होने पर प्रभावित हिस्से को साफ-सूखा रखना चाहिए और मनमाने ढंग से क्रीम लगाने से बचना चाहिए। समस्या लंबे समय तक रहे, फैलती जाए या लक्षण गंभीर हों तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे उचित कदम है।











