PMCH में जल्द बनेगा Level-1 Trauma Center, गंभीर मरीजों को 15 मिनट में इलाज देने की तैयारी

PMCH में Level-1 Trauma Center की तैयारी है। न्यूरो सर्जरी समेत 6 विशेषज्ञ सेवाएं एकीकृत होंगी और गंभीर मरीजों को 15 मिनट में इलाज शुरू करने का लक्ष्य है।

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में Level-1 Trauma Center शुरू करने की तैयारी है। प्रस्तावित सेंटर में न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी समेत छह विशेषज्ञ सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, ताकि गंभीर ट्रॉमा मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।

PMCH Level-1 Trauma Center: पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में गंभीर सड़क हादसों और मल्टीपल इंजरी वाले मरीजों के इलाज के लिए Level-1 Trauma Center विकसित करने की तैयारी है। हड्डी रोग विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। योजना के तहत मरीज के अस्पताल पहुंचने के 15 मिनट के भीतर इलाज शुरू करने और 24 घंटे विशेषज्ञ टीम उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

PMCH में एक जगह मिलेगी छह विशेषज्ञ सेवाएं

PMCH में रोजाना करीब 15 से 20 गंभीर ट्रॉमा मरीज पहुंचते हैं। फिलहाल मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर ट्रायज सिस्टम के जरिए इलाज दिया जाता है। लेकिन सिर, हड्डियों और शरीर के कई हिस्सों में एक साथ चोट लगने वाले मरीजों के इलाज के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ विभागों के बीच तेजी से समन्वय जरूरी होता है।

PMCH में जल्द बनेगा Level-1 Trauma Center, गंभीर मरीजों को 15 मिनट में इलाज देने की तैयारी

प्रस्तावित Level-1 Trauma Center में न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी को एकीकृत सिस्टम के तहत लाने की योजना है। इसका उद्देश्य मरीज के पहुंचते ही जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू करना है, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता या विभागों के बीच समन्वय में अनावश्यक समय न लगे।

जरूरत के अनुसार ऑपरेशन थिएटर, ICU, ब्लड बैंक और जांच की सुविधाएं भी तत्काल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे गंभीर सिर की चोट, हड्डियों की चोट और कई अंगों में चोट वाले मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

15 मिनट में इलाज शुरू करने का लक्ष्य

PMCH में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर का मुख्य लक्ष्य गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के मुताबिक, मरीज के पहुंचते ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति का आकलन करेगी और आवश्यक उपचार शुरू किया जाएगा।

मल्टीपल इंजरी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। एक ही मरीज को न्यूरो सर्जन, ऑर्थोपेडिक, जनरल सर्जन और एनेस्थेसिया विशेषज्ञ की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सभी विशेषज्ञ सेवाओं को एक सिस्टम में लाने से उपचार प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

समय पर इलाज मिलने से गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत भी कम हो सकती है। PMCH के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश चौधरी के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और इसे Level-1 Trauma Center के मानकों के अनुरूप विकसित करने का प्रयास है।

बिहार में ट्रॉमा केयर के सामने बड़ी चुनौतियां

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 8,873 लोगों की मौत और 6,539 लोग घायल हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे में मिलने वाली चिकित्सा सहायता मरीज की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने के बाद तेजी से इलाज उपलब्ध कराना ट्रॉमा केयर की बड़ी जरूरत है।

राज्य सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 11 नए ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई थी। इनमें गोपालगंज, मधुबनी, कैमूर, नालंदा, पूर्वी चंपारण, अररिया, वैशाली, बांका, नवादा, खगड़िया और गया शामिल हैं। इससे पहले PMCH समेत राज्य के 10 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को Level-2 Trauma Center के रूप में अधिसूचित किया गया था।

हालांकि, ट्रॉमा सेंटरों के प्रभावी संचालन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ अत्याधुनिक उपकरण और 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं की जरूरत होती है। PMCH के पूर्व अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, मानव संसाधन और उपकरणों की कमी ट्रॉमा सेंटरों के संचालन में बड़ी चुनौती है।

PMCH में प्रस्तावित सेंटर के सामने भी यही चुनौती रहेगी। अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी विभाग, विशेषज्ञ डॉक्टर, ऑपरेशन थिएटर, ICU, ब्लड बैंक और जांच सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। अब इन संसाधनों को एकीकृत कर 24 घंटे विशेषज्ञ टीम उपलब्ध कराने की योजना है। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेंटर में विशेषज्ञों, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरणों, ब्लड बैंक और ऑपरेशन-ICU सेवाओं के बीच समन्वय कितनी प्रभावी तरह से कायम किया जाता है।

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