Skill India Mission के तहत युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और स्टाइपेंड आधारित कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। Samsung DOST जैसे मॉडल उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित कर रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
Skill India Mission: भारत में कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार और उद्योगों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। Samsung DOST जैसे कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण, स्टाइपेंड और वास्तविक कार्य अनुभव देकर नौकरी के लिए तैयार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मॉडल भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कौशल विकास से रोजगार तक का सफर
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भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और बड़ी युवा आबादी को रोजगार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2015 में शुरू किए गए Skill India Mission के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और आईटीआई नेटवर्क के विस्तार ने कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी जरूरी है।
बदलती नौकरी की जरूरतों के अनुसार बदल रही है स्किलिंग
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में कंपनियों की जरूरतें भी लगातार बदल रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार आने वाले वर्षों में लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन उनके लिए जरूरी कौशल भी पहले से अलग होंगे। ऐसे में पारंपरिक क्लासरूम आधारित पढ़ाई और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को कम करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशिक्षण के साथ व्यावहारिक अनुभव, स्टाइपेंड और उद्योगों में काम करने का अवसर मिले तो युवाओं के रोजगार पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कॉर्पोरेट भागीदारी क्यों बन रही है जरूरी?
सरकार ने कौशल विकास के लिए आईटीआई, प्रशिक्षण केंद्र और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मजबूत आधार तैयार किया है। अब उद्योग जगत की भूमिका इस प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने की है। कंपनियां अपने सेक्टर की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देकर युवाओं को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव उपलब्ध करा सकती हैं।
इसी सोच के तहत कई निजी कंपनियां स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम चला रही हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षुओं को रोजगार योग्य बनाना और उन्हें उद्योगों में अवसर उपलब्ध कराना है।
Samsung DOST मॉडल कैसे कर रहा है मदद
Samsung DOST ऐसा ही एक कौशल विकास कार्यक्रम है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल सेक्टर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम में युवाओं को डिजिटल लर्निंग के साथ पांच महीने की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड भी मिलता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा भी बिना अतिरिक्त बोझ के प्रशिक्षण पूरा कर सकें।
प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों का मूल्यांकन सेक्टर स्किल काउंसिल के माध्यम से किया जाता है और सफल प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। कंपनी के अनुसार कार्यक्रम का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इसका लाभ मिल सके।
आईटीआई छात्रों के लिए भी चल रहा है विशेष कार्यक्रम
Samsung DOST का एक अन्य हिस्सा सरकारी आईटीआई छात्रों पर केंद्रित है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की रिपेयरिंग, सर्विस और मेंटेनेंस से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इस पहल के माध्यम से कई राज्यों के सरकारी आईटीआई में पढ़ने वाले हजारों छात्र आधुनिक तकनीकी कौशल सीख चुके हैं, जिससे उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
भविष्य की जरूरत बनेगी उद्योग और सरकार की साझेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में केवल डिग्री या प्रमाणपत्र ही रोजगार की गारंटी नहीं होंगे। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, स्टाइपेंड और रोजगार सहायता जैसे मॉडल अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। Skill India Mission के साथ निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत में कौशल विकास का अगला चरण सरकार, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करेगा। यदि अधिक कंपनियां Samsung DOST जैसे रोजगार-केंद्रित कार्यक्रम शुरू करती हैं, तो बड़ी संख्या में युवाओं को कौशल के साथ-साथ स्थायी रोजगार पाने का अवसर भी मिल सकता है।








