Stock Market Crash: सेंसेक्स में 1,000 अंक से ज्यादा गिरावट, निवेशकों के ₹4 लाख करोड़ डूबे, जानें वजह

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली, सेंसेक्स 1,000 अंक गिरा और निफ्टी 50 दबाव में रहा। निवेशकों के कुल 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली आई। सेंसेक्स 1,000 अंक फिसला और निफ्टी 50 दबाव में रहा। मिड-कैप व स्मॉल-कैप इंडेक्स भी गिरे। निवेशकों को एक ही दिन में लगभग ₹4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार (19 फरवरी) को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में गिरावट ने निवेशकों के चेहरे पर चिंता ला दी। बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक के करीब फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 ने दिन के दौरान 25,567.75 तक की गिरावट दर्ज की।

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सेशन के 472 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिन के दौरान लगभग 468 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह निवेशकों को एक ही दिन में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में भी आधे प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई।

मुनाफावसूली के चलते गिरावट

हाल में बाजार में लगातार बढ़त के बाद गुरुवार को मुनाफावसूली का असर साफ दिखाई दिया। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने लगातार तीसरे ट्रेडिंग सेशन में बढ़त दर्ज की थी। बजट, भारत-अमेरिका समझौता और आरबीआई की मौद्रिक नीति जैसे प्रमुख कारकों के बीत जाने के बाद नए घरेलू ट्रिगर्स की कमी से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, तीन दिन की तेजी के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की। इससे बाजार में चौतरफा दबाव बना और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों इंडेक्स नीचे चले गए।

ईरान-यूएस टेंशन ने बढ़ाया दबाव

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया। जियोजित इंवेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों का मनोबल कमजोर किया। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार में भी बिकवाली देखने को मिली।

ब्रेंट क्रूड की कीमत इस साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित रुकावट ने वैश्विक आपूर्ति पर दबाव डाला। अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बदलाव और रुपये की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार को प्रभावित किया।

इसके अलावा, लूनर न्यू ईयर की छुट्टी के कारण एशिया के कई बाजार बंद रहे। इससे विदेशी निवेशकों (FII) की भागीदारी कम रही और भारत में क्षेत्रीय बैंक हॉलिडे की वजह से सेटलमेंट प्रभावित हुआ।

हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

सेंसेक्स की बड़ी कंपनियों में गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में बिकवाली ने सेंसेक्स की कुल गिरावट में सबसे बड़ा योगदान दिया।

इसके अलावा एमएंडएम, भारती एयरटेल, आईटीसी, एक्सिस बैंक, एलएंडटी और कोटक बैंक के शेयरों में भी दबाव बना रहा। इन सभी हैवीवेट शेयरों ने मिलकर सेंसेक्स की कुल गिरावट में लगभग 70 प्रतिशत योगदान किया।

तीन दिन की लगातार तेजी के बाद अब बाजार में प्रॉफिट बुकिंग ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक और घरेलू स्तर पर नए सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना के लिए तैयार रहना चाहिए।

बिकवाली का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। बीएसई के मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में भी लगभग आधे प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह साफ हुआ कि बाजार में दबाव व्यापक स्तर पर था और निवेशक जोखिम से बचने के लिए अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे थे।

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