अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ और कुछ सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाया। कनाडा ने जवाब में 20 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर शुल्क लगाया, जिससे व्यापार तनाव और बढ़ गया।
वॉशिंगटन: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव मंगलवार को और बढ़ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले कुछ सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और कई अन्य उत्पादों पर नए टैरिफ लागू करने के आदेश जारी किए। इस कदम के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी के जल्द खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ट्रंप के नए आदेश के तहत कनाडा के कई उत्पादों पर 15 सितंबर से 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इनमें गद्दे, मोटरबोट और गोल्फ कार्ट जैसे उपभोक्ता सामान शामिल हैं। वहीं, कुछ मादक पेय और कुछ डेयरी उत्पादों, जिनमें व्हे भी शामिल है, के आयात पर प्रतिबंध 29 सितंबर से प्रभावी होगा।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कनाडा ने भी अमेरिका के उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लागू कर दिए हैं। ओटावा ने मंगलवार से अमेरिकी आयात के 27.6 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सामान पर शुल्क लगाया है।
कनाडा के जवाबी टैरिफ के बाद ट्रंप का कदम
कनाडा ने अमेरिका के उन टैरिफ के जवाब में जवाबी शुल्क लगाए हैं, जिनकी घोषणा वॉशिंगटन ने 22 अगस्त को की थी। कनाडा के नए शुल्कों के दायरे में स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों के अलावा पनीर जैसे डेयरी उत्पाद भी शामिल हैं।
अमेरिका की ओर से नए प्रतिबंध और अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनके देश के पास आर्थिक संबंधों में बदलाव करने और आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन मौजूद हैं।
कार्नी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करने की प्रक्रिया की अपनी लागत होगी, लेकिन उनके अनुसार निष्क्रिय रहने की कीमत उससे कहीं अधिक हो सकती है।
कार्नी ने यह भी कहा कि वह व्यापार विवाद को और बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन कनाडा द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क श्रमिकों, कंपनियों और समुदायों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
अमेरिकी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से कनाडाई कंपनियों को हटाने की तैयारी
ट्रंप ने कनाडा के जवाबी टैरिफ के बाद एक और कदम उठाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि वह कनाडाई कंपनियों को अमेरिकी सरकार के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने से रोकने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।
ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अधिकारियों को कनाडा में बने उत्पादों को अमेरिकी जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन यानी GSA के मल्टीपल अवॉर्ड शेड्यूल से हटाने का निर्देश दिया है।
GSA के इन शेड्यूल के माध्यम से होने वाले सरकारी कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य सालाना 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। यदि कनाडाई कंपनियों और उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर किया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर और बढ़ सकता है।
बॉम्बार्डियर पर भी ट्रंप ने दी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद में कनाडाई विमान निर्माता बॉम्बार्डियर भी निशाने पर आ गया है। ट्रंप ने सोमवार को कनाडा की इस कंपनी के विमानों की अमेरिका में बिक्री रोकने की कोशिश करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कंपनी अपना उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करती है तो स्थिति अलग हो सकती है।
क्यूबेक स्थित बॉम्बार्डियर ने इसके जवाब में अमेरिका में अपने रोजगार योगदान को रेखांकित किया। कंपनी ने कहा कि वह अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराती है और देश में हजारों नौकरियों का समर्थन करती है।
कंपनी के मुताबिक, उसके अमेरिकी कारोबार से जुड़े रोजगार में अकेले कंसास में 1,200 से अधिक नौकरियां शामिल हैं। कंसास का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटरों ने भी इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस के सामने चिंता जताई।
सीनेटर रोजर मार्शल ने कहा कि वह कंसास की बॉम्बार्डियर से जुड़ी नौकरियों को बचाने के लिए प्रयास करेंगे। सीनेटर जेरी मोरन ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की।
![]()
कनाडा की अर्थव्यवस्था पर दबाव, लेकिन असर सीमित रहने का अनुमान
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ कनाडा की पूरी अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा करते हैं। हालांकि, इसका असर देश के केंद्रीय हिस्सों में स्थित विनिर्माण क्षेत्र पर अधिक पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि दोनों देशों के बीच विवाद को बढ़ाना रचनात्मक नहीं है। फिर भी उन्होंने कनाडा के जवाबी शुल्कों का बचाव करते हुए कहा कि सरकार को अपने श्रमिकों और कंपनियों की रक्षा करनी होगी।
कनाडा के अमेरिकी व्यापार मामलों के प्रभारी मंत्री डोमिनिक लेब्लांक ने मंगलवार देर रात कहा कि ओटावा नए अमेरिकी टैरिफ उपायों का आकलन कर रहा है।
21 अगस्त को टूट गई थी बातचीत
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता 21 अगस्त को टूट गई थी। इससे पहले दोनों देशों के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन में कई दिनों तक बातचीत हुई थी।
उस समय कार्नी ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी वार्ताकारों ने बातचीत के अंतिम चरण में कनाडा के अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को लेकर प्रतिबंधों की मांग रखी थी। उन्होंने फ्रांसीसी भाषा और क्यूबेक की संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर कथित अमेरिकी धमकियों को भी अस्वीकार्य बताया था।
इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू नहीं हुई है। नए टैरिफ और आयात प्रतिबंधों से इस विवाद के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है।
कनाडा पर अमेरिकी बाजार की बड़ी निर्भरता
व्यापार विवाद कनाडा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा के लगभग 60 प्रतिशत आयात अमेरिका से आते हैं, जबकि उसके करीब 70 प्रतिशत निर्यात का गंतव्य अमेरिकी बाजार है।
ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में किसी भी बड़े बदलाव का असर कनाडाई कारोबार, विनिर्माण, श्रमिकों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
कनाडाई सरकार ने टैरिफ से प्रभावित कारोबार और श्रमिकों की सहायता के लिए 7.5 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर का सहायता पैकेज भी घोषित किया है।
ट्रंप-कनाडा संबंधों में बढ़ती राजनीतिक तल्खी
व्यापार विवाद के साथ दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में भी तनाव बढ़ा है। ट्रंप पहले कनाडा को अमेरिका का एक और राज्य बनाने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक चित्र साझा किया, जिसमें वह कार्नी से काफी बड़े नजर आ रहे थे और उन्हें उठने के लिए कह रहे थे।
अगस्त में ट्रंप ने कनाडा की सीमा से लगे लेक ओंटारियो का नाम बदलकर “लेक अमेरिका” करने का आदेश भी दिया था। इस कदम पर कनाडा में तीखी प्रतिक्रिया हुई और अमेरिका के प्रति राष्ट्रीय भावनाएं और मजबूत हुईं।
मार्क कार्नी को कनाडाई जनता का समर्थन प्राप्त है, लेकिन देश की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता उनके सामने बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच टैरिफ, प्रतिबंध और व्यापार वार्ता को लेकर उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, ट्रंप के नए आदेशों और कनाडा के जवाबी शुल्कों ने अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध को एक और स्तर पर पहुंचा दिया है। दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होती है या टैरिफ और प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ता है, इस पर वैश्विक बाजार और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की नजर रहेगी।










