तेलंगाना के वारंगल में BRS ने किसानों की समस्याओं को लेकर धरना दिया। पूर्व विधायक नन्नापननेनी नरेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने खाद, बीज, बिजली, कर्जमाफी और फसल बीमा से जुड़ी मांगें उठाईं।
वारंगल: तेलंगाना के वारंगल में भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने गुरुवार को किसानों की समस्याओं को लेकर धरना दिया। वारंगल ईस्ट के पूर्व विधायक नन्नापननेनी नरेंद्र के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने MRO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से जुड़ी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। BRS ने कांग्रेस सरकार पर सत्ता में अपने पहले 1,000 दिनों के दौरान किसानों से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
MRO कार्यालय के बाहर BRS कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
वारंगल में आयोजित इस धरने में BRS नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कृषि क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारियों ने किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता, कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति, फसल बीमा और कर्जमाफी सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
धरने का नेतृत्व वारंगल ईस्ट के पूर्व विधायक नन्नापननेनी नरेंद्र ने किया। प्रदर्शन के बाद BRS नेताओं ने किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। पार्टी का कहना है कि सरकार को किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना चाहिए और चुनाव के दौरान किए गए वादों को जमीन पर लागू करना चाहिए।
यह प्रदर्शन BRS के राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसे पार्टी ने 2 से 8 सितंबर तक चलाने की घोषणा की है। पार्टी इस अभियान के जरिए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रही है।
नन्नापननेनी नरेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर लगाए आरोप
धरने को संबोधित करते हुए नन्नापननेनी नरेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किसानों के हित में कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उनके अनुसार इन वादों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि कृषि समुदाय को सरकारी नीतियों और योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने और लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
नरेंद्र ने राज्य सरकार के भीतर कथित राजनीतिक मतभेदों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं के बीच आपसी खींचतान और सत्ता से जुड़े हितों की वजह से जनकल्याण के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
हालांकि, सरकार या संबंधित कांग्रेस नेताओं की ओर से इन सभी आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया की जानकारी स्रोत में नहीं दी गई है। इसलिए BRS द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
वारंगल ईस्ट को लेकर भी पूर्व विधायक का बड़ा आरोप
नन्नापननेनी नरेंद्र ने वारंगल ईस्ट विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र को एक विशेष व्यक्ति के प्रभाव में छोड़ दिया गया है और उस व्यक्ति पर शहर में कई कथित अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप हैं।
पूर्व विधायक ने दावा किया कि BRS जल्द ही इन कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों को जनता के सामने रखेगी। हालांकि, उन्होंने जिन कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया, उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के उपलब्ध स्रोत से नहीं होती है।
राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जाने वाले आरोपों के मामले में संबंधित पक्ष का जवाब और स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि आधिकारिक जांच या उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।
किसानों ने खाद और बीज की उपलब्धता का मुद्दा उठाया
धरने में शामिल किसानों ने भी कृषि क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं को लेकर अपनी शिकायतें सामने रखीं। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यूरिया और बीज हासिल करने के लिए उन्हें लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना था कि कई बार खाद और बीज के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे खेती का काम प्रभावित होता है। कृषि सीजन के दौरान समय पर इनपुट नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ जाती है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद और गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि कृषि गतिविधियां मौसम और बुवाई के समय से जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी तरह की देरी का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है।
24 घंटे मुफ्त बिजली की व्यवस्था का भी जिक्र
धरने के दौरान किसानों ने पिछली BRS सरकार के दौरान कृषि पंपसेट के लिए 24 घंटे मुफ्त बिजली आपूर्ति का भी जिक्र किया। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने दावा किया कि उस समय उन्हें कृषि कार्यों के लिए अधिक नियमित बिजली मिलती थी।
कुछ किसानों ने मौजूदा बिजली आपूर्ति को अनियमित और अप्रत्याशित बताया। उनका कहना है कि कृषि पंपसेट के लिए बिजली की उपलब्धता में अनिश्चितता खेती की योजना और सिंचाई व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
बिजली आपूर्ति का मुद्दा तेलंगाना में कृषि राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सिंचाई के लिए भरोसेमंद बिजली किसानों की लागत और फसल प्रबंधन दोनों को प्रभावित करती है। इसी वजह से BRS ने इस मुद्दे को अपने मौजूदा अभियान में प्रमुखता दी है।
BRS का राज्यव्यापी किसान अभियान
वारंगल का प्रदर्शन BRS के व्यापक राजनीतिक अभियान के बीच हुआ है। पार्टी ने 2 से 8 सितंबर तक राज्यभर में किसानों और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
BRS के अभियान को Jung Siren–Samara Shankam नाम दिया गया है। इसके तहत 3 सितंबर को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में किसान सम्मेलनों के जरिए सिंचाई, बिजली आपूर्ति, यूरिया की उपलब्धता, फसल बीमा और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
पार्टी का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने लाना और कांग्रेस सरकार से अपने चुनावी वादों को पूरा करने की मांग करना है।
कर्जमाफी और कृषि योजनाओं पर भी सवाल
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष K.T. रामा राव ने भी कांग्रेस सरकार की कृषि नीतियों को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान किए गए 50,000 करोड़ रुपये की कृषि ऋणमाफी के वादे को घटाकर करीब 20,000 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया।
इसके अलावा BRS ने फसल खरीद में कथित देरी और कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में विलंब को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि इन समस्याओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की स्थिति पर दबाव बढ़ाया है।
हालांकि, ऋणमाफी की वास्तविक राशि, लाभार्थियों की संख्या और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। BRS द्वारा जारी किए गए दावों को पार्टी के राजनीतिक आरोपों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
BRS ने जारी किया कथित आरोपपत्र
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर BRS ने करीब 30 कथित घोटालों और विफलताओं की सूची वाला एक राजनीतिक आरोपपत्र भी जारी किया है। पार्टी इसे सरकार के पहले 1,000 दिनों के प्रदर्शन से जोड़ रही है।
BRS का दावा है कि यह दस्तावेज किसानों, कृषि मजदूरों, महिलाओं, छात्रों, युवाओं और समाज के अन्य वर्गों से जुड़े कथित अधूरे वादों और समस्याओं को सामने रखता है।
अभियान के तहत पार्टी Baaki Cards यानी Due Cards भी वितरित कर रही है। इन कार्डों के जरिए BRS यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादे पूरे करने की जिम्मेदारी बाकी है।
आगे भी जारी रहेगा राजनीतिक अभियान
वारंगल का धरना BRS की राज्यव्यापी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी आने वाले दिनों में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है।
BRS का फोकस खास तौर पर कृषि ऋणमाफी, खाद-बीज की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति, सिंचाई, फसल बीमा और सरकारी सहायता जैसे मुद्दों पर है। इन मुद्दों के जरिए पार्टी ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर आने वाली प्रतिक्रिया भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगी। किसानों से जुड़े मुद्दे तेलंगाना की राजनीति में लगातार प्रभावी रहे हैं और आने वाले समय में इन पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल वारंगल में BRS के प्रदर्शन ने एक बार फिर किसानों की समस्याओं और चुनावी वादों के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक विवाद को सामने ला दिया है। पार्टी का कहना है कि वह इन मुद्दों को राज्यभर में उठाती रहेगी और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाएगी।








