नॉर्वे के किंग हेराल्ड V को अंतिम विदाई, ओस्लो में जुटे 48 हजार लोग

नॉर्वे के किंग हेराल्ड V को बुधवार को ओस्लो मे अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार मे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और ब्रिटेन के प्रिंस विलियम भी शामिल

नॉर्वे के किंग हेराल्ड V को बुधवार को ओस्लो में अंतिम विदाई दी गई। राजकीय अंतिम संस्कार में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और ब्रिटेन के प्रिंस विलियम समेत कई विदेशी गणमान्य शामिल हुए। करीब 48,000 लोग अंतिम यात्रा के दौरान मौजूद रहे।

ओस्लो: नॉर्वे ने बुधवार को अपने दिवंगत राजा हेराल्ड V को अंतिम विदाई दी। राजधानी ओस्लो में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार में देशभर से लोग पहुंचे। अंतिम यात्रा में करीब 48,000 लोग सड़कों पर मौजूद रहे। इस अवसर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और दुनिया के कई अन्य देशों के राजघरानों तथा वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।

89 वर्ष की उम्र में 28 अगस्त को निधन होने तक हेराल्ड यूरोप के सबसे उम्रदराज पदासीन सम्राट थे। नॉर्वे में वह बेहद लोकप्रिय रहे और उन्हें देश के खुले, सहिष्णु तथा लोगों को जोड़ने वाले व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता था।

ओस्लो की सड़कों पर उमड़ी भीड़

किंग हेराल्ड की अंतिम यात्रा राजमहल से शुरू होकर ओस्लो की सड़कों से गुजरी। बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों ओर खड़े होकर अपने राजा को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, जुलूस देखने के लिए करीब 48,000 लोग मौजूद थे।

राजा के ताबूत को तोपगाड़ी पर रखा गया था और उस पर लाल शाही ध्वज लिपटा हुआ था। ताबूत को शहर के मुख्य मार्ग से ले जाया गया। इस दौरान उनके बेटे और उत्तराधिकारी किंग हाकोन VIII, शाही परिवार के सदस्य और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति पैदल अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

किंग हेराल्ड की पत्नी 89 वर्षीय क्वीन सोन्या और नई क्वीन मेटे-मैरिट ने अंतिम यात्रा में कार से हिस्सा लिया।

विदेशी नेताओं और राजपरिवारों की मौजूदगी

किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार में कई देशों के राजपरिवारों और वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और ब्रिटेन के प्रिंस विलियम के अलावा स्कैंडिनेवियाई देशों के राजपरिवार भी मौजूद रहे।

स्पेन, बेल्जियम और नीदरलैंड के शाही जोड़े, जापान के क्राउन प्रिंस, फिनलैंड और जर्मनी के राष्ट्रपति तथा फ्रांस और थाईलैंड के प्रधानमंत्रियों सहित कई विदेशी गणमान्य व्यक्ति भी अंतिम संस्कार में पहुंचे।

विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस राजकीय अंतिम संस्कार के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया। नॉर्वे के राजा के निधन पर यूरोप और अन्य क्षेत्रों के राजपरिवारों तथा सरकारों की ओर से सम्मान व्यक्त किया गया।

एक मिनट के मौन से शुरू हुई प्रार्थना सभा

ओस्लो के लूथरन कैथेड्रल में अंतिम संस्कार की धार्मिक सेवा स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजे शुरू हुई। इसकी शुरुआत पूरे देश में एक मिनट के मौन के साथ हुई। इसके बाद धार्मिक और राजकीय परंपराओं के अनुरूप श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

अंतिम संस्कार में नॉर्वे की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की भी झलक दिखाई दी। कई धर्मों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए। नॉर्वे के मूल निवासी सामी समुदाय के एक प्रतिनिधि ने भी सामी भाषा में राजा को श्रद्धांजलि दी।

‘वह हमारे लिए चट्टान थे’

नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने श्रद्धांजलि भाषण में किंग हेराल्ड के व्यक्तित्व और उनके शासन की शैली को याद किया। उन्होंने कहा कि हेराल्ड ने राजसी गरिमा और आम लोगों से जुड़े सहज व्यवहार के बीच संतुलन कायम रखा।

स्टोरे ने कहा कि हेराल्ड ने नॉर्वे को बेहतर बनाया और ऐसे नॉर्वे की बात की, जिसमें लोग एक-दूसरे के साथ खड़े रहें।

एक स्थानीय नागरिक इंगर एलिस कोल्स्टो, जो 63 वर्षीय अकाउंटेंट हैं, ने राजा को याद करते हुए कहा कि वह उनके लिए “चट्टान” की तरह थे। यह टिप्पणी उस भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है जो हेराल्ड ने लंबे शासनकाल के दौरान नॉर्वे के लोगों के बीच बनाया था।

अखेर कहां दफनाए गए किंग हेराल्ड?

कैथेड्रल में अंतिम धार्मिक सेवा पूरी होने के बाद किंग हेराल्ड के ताबूत को अकेरशुस कैसल चर्च ले जाया गया। वहां परिवार के लिए निजी समारोह के बाद ताबूत को शाही समाधि स्थल के क्रिप्ट में रखा जाना था।

उन्हें उनके माता-पिता और दादा-दादी के पास दफनाया जाना था। रिपोर्ट के अनुसार, उनके लिए करीब 20 लाख अमेरिकी डॉलर की कीमत वाला एक सरकोफेगस तैयार किया गया था, जिसका डिजाइन सार्वजनिक नहीं किया गया था।

नॉर्वे के किंग हेराल्ड V को अंतिम विदाई, ओस्लो में जुटे 48 हजार लोग

F-35 लड़ाकू विमानों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम धार्मिक सेवा के समापन पर चार F-35 लड़ाकू विमानों ने कैथेड्रल के ऊपर फॉर्मेशन में उड़ान भरी। उसी दौरान किंग हेराल्ड का ताबूत अकेरशुस कैसल की ओर ले जाया गया।

यह सैन्य श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार के औपचारिक और राजकीय स्वरूप का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

1991 से सिंहासन पर थे हेराल्ड

किंग हेराल्ड वर्ष 1991 से नॉर्वे के सिंहासन पर थे। जीवन के अंतिम वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने के बावजूद उन्होंने पद छोड़ने या त्यागपत्र देने की संभावना से हमेशा इनकार किया था।

अपने लंबे शासनकाल में हेराल्ड को नॉर्वे की खुली और सहिष्णु छवि का प्रतीक माना गया। वर्ष 2016 में दिए गए उनके एक भाषण ने विविधता और समावेश को लेकर उनकी सोच को खास तौर पर सामने रखा।

उन्होंने अपने भाषण में नॉर्वे के लोगों को विभिन्न लैंगिक पहचान, धार्मिक विश्वास और जीवन दृष्टिकोण रखने वाले नागरिकों के रूप में स्वीकार करने की बात कही थी।

‘राष्ट्र के दादा’ के रूप में मिली पहचान

नॉर्वे के लोगों ने किंग हेराल्ड को प्यार से ‘राष्ट्र के दादा’ की छवि दी। अंतिम संस्कार से पहले कई दिनों तक ओस्लो स्थित राजमहल के सामने का चौक फूलों, चित्रों और मोमबत्तियों से भरा रहा। लोगों ने वहां पहुंचकर दिवंगत राजा को श्रद्धांजलि दी।

एक छात्र आर्थर फोशेम ने हेराल्ड की तुलना ऐसे प्रिय दादा से की, जो अपने परिवार के सभी बच्चों और पोते-पोतियों को उनके रूप या विश्वास की परवाह किए बिना स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि हेराल्ड समावेश और बहुसांस्कृतिक नॉर्वे की भावना का प्रतिनिधित्व करते थे।

अंतिम संस्कार के बाद फिर उठे राष्ट्रीय ध्वज

किंग हेराल्ड के निधन के बाद देशभर में झुकाए गए राष्ट्रीय ध्वज अंतिम संस्कार के बाद फिर से ऊपर उठाए गए। चर्च की घंटियां भी एक घंटे तक बजाई गईं।

इसके बाद केंद्रीय ओस्लो स्थित राजमहल की बालकनी से शाही परिवार ने वहां जमा भीड़ का अभिवादन किया। लोगों ने जयकारों के साथ राजपरिवार का स्वागत किया।

अंतिम संस्कार के दौरान कड़ी सुरक्षा

किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार को देखते हुए ओस्लो में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

हेराल्ड की लोकप्रियता का अंदाजा हालिया जनमत सर्वेक्षण से भी लगाया जा सकता है। राजा के निधन के बाद किए गए एक सर्वे में 72 प्रतिशत नॉर्वेवासियों ने राजशाही के समर्थन में राय दी। यह आंकड़ा मई में हुए पिछले सर्वेक्षण से 8 प्रतिशत अंक अधिक था।

हालांकि, इससे पहले फरवरी में राजपरिवार से जुड़े विवादों के बीच राजशाही का समर्थन घटकर 60 प्रतिशत के निचले स्तर तक पहुंच गया था। राजपरिवार से जुड़े कुछ विवादों और कानूनी मामलों ने उस समय संस्था की छवि पर असर डाला था।

किंग हेराल्ड V की अंतिम विदाई ने नॉर्वे में एक लंबे राजकीय युग के अंत को चिह्नित किया। हजारों नागरिकों, राजपरिवारों और विदेशी नेताओं की मौजूदगी ने उनके प्रति सम्मान और नॉर्वे के राष्ट्रीय जीवन में उनके लंबे योगदान को रेखांकित किया।

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