BSP Succession: मायावती का आकाश आनंद से भरोसा कम, ईशान आनंद पर बढ़ा दांव? जानें क्या है पार्टी की रणनीति

BSP Succession: मायावती ने आकाश आनंद को फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार किया है। बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी से उत्तराधिकार को लेकर नई अटकलें तेज हैं।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती के साथ मंच पर ईशान आनंद की मौजूदगी ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा। 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में हुई इस बैठक में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटाने का ऐलान किया।

UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया। पिछले करीब ढाई वर्षों में यह तीसरा मौका है, जब आकाश को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से हटाया गया है।

इसी बैठक में मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद भी मंच पर नजर आए। मायावती ने वरिष्ठ नेताओं से उनका परिचय कराया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगा है कि क्या BSP में आकाश आनंद की जगह अब ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है? हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि मायावती ने ईशान को अपना उत्तराधिकारी चुना है।

आकाश आनंद को तीन बार क्यों हटाया गया?

आकाश आनंद को 2023 में मायावती ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। उस समय इसे BSP में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। लेकिन इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान आकाश आनंद की आक्रामक बयानबाजी पर मायावती ने नाराजगी जताई। 7 मई 2024 को उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक समेत सभी प्रमुख जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। साथ ही, मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करने का फैसला भी वापस ले लिया।

हालांकि, करीब डेढ़ महीने बाद 22 जून को आकाश की राजनीतिक वापसी हुई। उन्हें उत्तराखंड उपचुनाव के लिए स्टार प्रचारक बनाया गया और बाद में हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड तथा दिल्ली विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी भी दी गई।

दूसरा झटका: ससुर के प्रभाव का आरोप

2 मार्च 2025 को मायावती ने आकाश को राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाया। अगले दिन उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उस समय मायावती ने आकाश के अपने ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आने की बात कही थी। अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले फरवरी 2025 में पार्टी से बाहर किया गया था। हालांकि, करीब 40 दिन बाद 13 अप्रैल को आकाश की BSP में वापसी हो गई और 18 मई 2025 को उन्हें फिर राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

3 सितंबर 2026 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में मायावती ने एक बार फिर आकाश को राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया। इस बार भी उनकी राजनीतिक परिपक्वता को लेकर सवाल उठाए गए। मायावती का तर्क रहा कि आकाश को अभी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए और अनुभव की जरूरत है।

BSP Succession: मायावती का आकाश आनंद से भरोसा कम, ईशान आनंद पर बढ़ा दांव? जानें क्या है पार्टी की रणनीति

क्या परिवारवाद से बचना चाहती हैं मायावती?

आकाश के मामले में बार-बार कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की व्याख्याएं हैं। वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के अनुसार, इसके पीछे तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं—आकाश की राजनीतिक परिपक्वता, परिवार के भीतर मतभेद और BSP में परिवारवाद की छवि से बचने की कोशिश।मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि वह अपने जीवनकाल में किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं करेंगी। उनका यह रुख BSP के संस्थापक कांशीराम की उस राजनीतिक सोच से जोड़ा जाता है, जिसमें परिवार के सदस्यों को संगठन में प्राथमिकता देने से बचने की बात कही गई थी।

ईशान आनंद की एंट्री से क्या बदलेगा?

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ईशान आनंद की मौजूदगी ने नए सवाल खड़े किए हैं। मायावती द्वारा उन्हें वरिष्ठ नेताओं से परिचित कराना जरूर महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है, लेकिन अभी उन्हें कोई बड़ी आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं दी गई है। ईशान हाल ही में लंदन से पढ़ाई पूरी करके लौटे हैं और उनके पास सक्रिय राजनीति का लंबा अनुभव नहीं है। 

पार्टी की युवा इकाई या किसी संगठनात्मक जिम्मेदारी में उन्हें आगे बढ़ाए जाने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञ ईशान को फिलहाल ‘उत्तराधिकारी’ के बजाय संभावित नए राजनीतिक चेहरे के तौर पर देख रहे हैं।

Leave a comment