कर्नाटक के रामनगर में नकली नोट छापने वाले कथित गिरोह का खुलासा हुआ है। इजूर पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड अशरफ अली समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इससे मामले में कुल गिरफ्तारियां 10 हो गई हैं। पुलिस ने ₹200 और ₹500 के नकली नोट बनाने की सामग्री बरामद की है।
रामनगर: कर्नाटक के रामनगर में नकली भारतीय करेंसी छापने के एक कथित रैकेट के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इजूर पुलिस ने मामले में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कथित तौर पर गिरोह का मास्टरमाइंड भी शामिल है। ताजा गिरफ्तारियों के बाद इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक निर्माणाधीन मकान से कथित तौर पर नकली ₹200 और ₹500 के नोट तैयार कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे, नकली नोट किस तरह तैयार किए जाते थे और उन्हें बाजार में कथित तौर पर कैसे चलाया जाता था।
कथित मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
इजूर पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को हाल में गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अशरफ अली (35), मंजू (37) और नागराज (48) के रूप में हुई है।
अशरफ अली मूल रूप से चामराजनगर का रहने वाला बताया गया है, जबकि मंजू और नागराज कनकपुरा के निवासी हैं। पुलिस को संदेह है कि अशरफ अली इस कथित नकली मुद्रा नेटवर्क का मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड है।
पुलिस का कहना है कि इन तीनों से पूछताछ के जरिए गिरोह की कार्यप्रणाली और उसके पीछे मौजूद अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जांचकर्ताओं का ध्यान अब यह पता लगाने पर है कि नकली नोट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया कौन संचालित करता था और तैयार किए गए नोटों को किन माध्यमों से कथित तौर पर बाजार में पहुंचाया जाता था।
31 अगस्त को छापेमारी के बाद सामने आया रैकेट
नकली करेंसी का यह कथित रैकेट उस समय सामने आया, जब इजूर पुलिस ने 31 अगस्त को शांतिलाल लेआउट स्थित एक निर्माणाधीन मकान पर छापेमारी की।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान वहां से सात लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस को संदेह हुआ कि परिसर का इस्तेमाल नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, मौके पर आरोपी कथित तौर पर ₹200 और ₹500 के नकली नोट तैयार करने में लगे हुए थे। छापेमारी के दौरान ऐसे कई सामान और उपकरण भी बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल नकली नोट बनाने की प्रक्रिया में किए जाने का आरोप है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाया और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश शुरू की।
नकली नोट बनाने का सामान बरामद
पुलिस ने निर्माणाधीन मकान से कथित तौर पर नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न सामग्री बरामद की।
बरामद सामान में कागज, केमिकल, कपड़ा, कांच की शीट, टेबल और अन्य वस्तुएं शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों और उपकरणों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परिसर में नकली नोट तैयार करने का काम किस तरीके से किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां अब बरामद सामग्री की जांच कर रही हैं, ताकि कथित तौर पर नकली मुद्रा तैयार करने की प्रक्रिया और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को समझा जा सके।
हालांकि, बरामद वस्तुओं का इस्तेमाल किस स्तर और किस तरीके से किया गया, इसका अंतिम विवरण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पहली कार्रवाई में सात लोग पकड़े गए थे
31 अगस्त की छापेमारी में गिरफ्तार किए गए सात लोगों की पहचान भी पुलिस ने की है।
इनमें मगड़ी तालुक के गट्टीपुरा निवासी मकान मालिक संतोष, मयागनहल्ली निवासी संपत, इजूर निवासी राजेश, कनकपुरा के डीके लेआउट निवासी रेणुकराज, कल्लाहल्ली गेट निवासी शिवराज, होसकोटे तालुक के कल्लाहल्ली गांव निवासी गोविंदराज और पांडवपुरा निवासी सतीश शामिल हैं।
पुलिस अब इन आरोपियों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली मुद्रा तैयार करने की गतिविधि कितने समय से चल रही थी और इसमें प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी।
10 आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच को मिलेगी दिशा
ताजा गिरफ्तारियों के बाद मामले में कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस को उम्मीद है कि कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि गिरोह का संचालन कौन करता था और नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें किन इलाकों में कथित तौर पर पहुंचाया जाता था।
इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के तार रामनगर के बाहर अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े हुए थे या नहीं।
यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
नकली नोटों की सप्लाई को लेकर जांच
किसी भी नकली मुद्रा नेटवर्क की जांच में केवल नोट तैयार करने वाले लोगों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं होता। पुलिस को यह भी पता लगाना होता है कि नकली नोटों को बाजार में किस तरह पहुंचाया गया और उन्हें चलाने में किन लोगों ने मदद की।
रामनगर पुलिस भी इसी दिशा में जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों के सामने यह पता लगाना अहम है कि बरामद कथित नकली नोटों की संख्या कितनी थी और क्या इनमें से कुछ नोट पहले ही बाजार में भेजे जा चुके थे।
इसके अलावा, पुलिस कथित नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की भी जांच कर सकती है, ताकि पूरे रैकेट की संरचना का पता लगाया जा सके।
निर्माणाधीन मकान का इस्तेमाल क्यों किया गया?
पुलिस जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि नकली नोट तैयार करने के लिए निर्माणाधीन मकान का कथित तौर पर इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था।
ऐसी जगहों पर सामान्य गतिविधियों की तुलना में आवाजाही और सामान की मौजूदगी को लेकर कम ध्यान जाने की संभावना हो सकती है। हालांकि, इस मामले में आरोपियों ने इस स्थान का चयन किन कारणों से किया था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
मकान मालिक संतोष भी पहली कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए सात लोगों में शामिल है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परिसर में चल रही गतिविधियों के बारे में उसे क्या जानकारी थी और उसकी भूमिका क्या थी।
पुलिस को अन्य आरोपियों की तलाश की संभावना
मामले में 10 गिरफ्तारियां होने के बावजूद जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल थे।
कथित मास्टरमाइंड अशरफ अली से पूछताछ के दौरान पुलिस को नेटवर्क के वित्तपोषण, सामग्री की खरीद, नकली नोटों की छपाई और उनके कथित वितरण से संबंधित जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि क्या किसी संगठित गिरोह या बाहरी नेटवर्क की इस गतिविधि में भूमिका थी।
नकली करेंसी पर पुलिस की सख्ती
नकली भारतीय मुद्रा की छपाई और उसका प्रचलन देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर नकली नोटों के स्रोत से लेकर उनके वितरण नेटवर्क तक की जांच करती है।
रामनगर में हुई यह कार्रवाई भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा है। निर्माणाधीन मकान से कथित तौर पर नकली नोट तैयार किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पहले सात लोगों को गिरफ्तार किया और इसके बाद तीन अन्य संदिग्धों को पकड़ा।
आगे की जांच में नेटवर्क की तस्वीर होगी साफ
पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित रैकेट का वास्तविक संचालन किस स्तर पर हो रहा था। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बरामद सामग्री, उपकरण, नकली नोट और आरोपियों के बयानों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जाए।
फिलहाल पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड समेत तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और कुल गिरफ्तारियां 10 तक पहुंच गई हैं। आगे की पूछताछ से नकली नोटों की छपाई, वितरण और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
आरोपियों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।









