छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने CGPSC पेपर लीक मामले में आरोपी रिटायर्ड IAS जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक करना ऐसा अपराध है, जो लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है।
रायपुर: CGPSC पेपर लीक मामला में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने जैसे अपराध का असर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने CGPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व CGPSC सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है, इसलिए ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले अपराध समाज के व्यापक हितों को प्रभावित करते हैं और इनका असर केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता।
2021 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 की राज्य सिविल सेवा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। आरोप है कि उस समय आयोग के सचिव रहे जीवन किशोर ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई और उन्हें अपने बेटे तक पहुंचाया। उनके बेटे सुमित ध्रुव का चयन इसी भर्ती प्रक्रिया में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था।
सीबीआई ने इस मामले की जांच के दौरान सितंबर 2025 में जीवन किशोर ध्रुव को गिरफ्तार किया था। इससे पहले जुलाई 2024 में केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
अदालत ने साक्ष्यों को माना प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी की कथित भूमिका की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने भी माना कि उपलब्ध साक्ष्य इस स्तर पर मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं और विस्तृत सुनवाई से पहले जमानत देना उचित नहीं होगा।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलील दी कि जीवन किशोर ध्रुव को केवल उनके पद के कारण इस मामले में आरोपी बनाया गया है। उनका कहना था कि प्राथमिकी में शुरुआत में उनका नाम शामिल नहीं था और उनके पास से कोई गोपनीय दस्तावेज या प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं। यदि प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो उनकी मेहनत और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया दोनों पर गंभीर असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से समाज का सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा भी कमजोर होता है।
CGPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा चुकी है। जांच एजेंसी इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और आने वाले समय में इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।













