आज कमरछठ पर माताएं रखेंगी व्रत, पसहर चावल से खुलेगा उपवास; शिव-पार्वती की होगी पूजा

कमरछठ यानी हलषष्ठी पर माताएं संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखेंगी। शिव-पार्वती पूजा के बाद पसहर चावल से पारण होगा।

कमरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत 2 सितंबर को संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाएगा। महिलाएं दिनभर उपवास करेंगी, सगरी बनाकर पूजा करेंगी और कथा सुनने के बाद पसहर चावल से व्रत खोलेंगी।

रायपुर: संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना से महिलाएं आज 2 सितंबर को कमरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत रखेंगी। छत्तीसगढ़ में कमरछठ के नाम से प्रसिद्ध इस पर्व पर शिव-पार्वती की पूजा, सगरी निर्माण और कथा श्रवण की परंपरा है। पूजा के बाद महिलाएं पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलेंगी।

कमरछठ पर सगरी बनाकर होगी पूजा

कमरछठ के अवसर पर महिलाएं सगरी बनाकर उसमें छह प्रकार के खिलौने रखेंगी। इसके बाद पार्थिव शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाएगी। पूजा में भैंस के दूध, दही और घी के साथ लाई, महुआ, तिल और अरहर समेत छह प्रकार के अन्न का भोग लगाया जाएगा।

आज कमरछठ पर माताएं रखेंगी व्रत, पसहर चावल से खुलेगा उपवास; शिव-पार्वती की होगी पूजा

भादो मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को अलग-अलग क्षेत्रों में हलषष्ठी, हलछठ और चंदनछठ के नाम से भी जाना जाता है। संतानहीन दंपति भी संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत करते हैं।

हल से जुते अन्न का सेवन नहीं करने की परंपरा

कमरछठ की पूजा में हल से जुड़े अन्न का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं हल से जुते खेत का अन्न नहीं खाती हैं। पूजा के बाद पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी से तैयार प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

शहर के अलग-अलग इलाकों में कमरछठ को लेकर बाजार भी सज गए हैं। पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी और भौरा सहित पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की दुकानें लगी हैं।

पसहर चावल की बढ़ी मांग

हलषष्ठी पर विशेष रूप से इस्तेमाल होने के कारण पसहर चावल की मांग बढ़ गई है। बाजार में यह करीब 20 से 30 रुपये प्रति गिलास की कीमत पर बिक रहा है। इसकी अलग-अलग किस्में भी उपलब्ध हैं।

आज शहर के कई मोहल्लों और अन्य स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से कमरछठ की पूजा करेंगी और व्रत की कथा सुनेंगी। पूजा स्थलों पर प्रतीकात्मक सगरी तालाब बनाए जाएंगे, जिनमें पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे।

पूजा के दौरान महिलाएं शिव-पार्वती सहित अन्य देवी-देवताओं को पूजन सामग्री अर्पित कर संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करेंगी। इसके बाद पसहर चावल और बिना हल से जुते अन्न से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाएगा

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