नींद का बार-बार टूटना क्यों है खतरनाक, जानें हार्ट से जुड़ा खतरा

रात में बार-बार नींद टूटने से ब्लड प्रेशर, सूजन और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। समय पर नींद की आदतें सुधारना और तनाव कम करना जरूरी है।

रात में बार-बार नींद टूटना दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है। रिसर्च और डॉक्टरों के अनुसार, इससे ब्लड प्रेशर, इंफ्लामेशन और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ता है। समय पर नींद की आदतों में सुधार और तनाव कम करना जरूरी है, ताकि दिल और दिमाग दोनों स्वस्थ रह सकें।

बार-बार नींद टूटना और दिल की सेहत: रात में नींद बार-बार टूटने की समस्या आज कई लोगों में देखी जा रही है। यह समस्या घर पर, रोजमर्रा की दिनचर्या में और लंबे समय से झेल रहे लोगों में ज्यादा सामने आती है। डॉक्टरों और स्टडी के मुताबिक, ऐसा होने पर दिल को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है। यह स्थिति तनाव, स्लीप एपनिया और देर रात स्क्रीन देखने वालों में ज्यादा पाई जाती है, इसलिए समय रहते सावधानी जरूरी है।

बार-बार नींद टूटने से दिल पर क्या असर पड़ता है

रात की गहरी नींद के दौरान दिल को आराम मिलता है और ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर रहता है। लेकिन जब नींद बीच-बीच में टूटती है, तो हार्ट पर दबाव बढ़ जाता है। इससे शरीर में सूजन यानी इंफ्लामेशन बढ़ सकती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।

स्टडी में यह भी सामने आया है कि जो लोग रात में दो से तीन बार नींद टूटने की शिकायत करते हैं, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा करीब 30 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसके साथ ही ब्रेन फंक्शन पर भी असर पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और एकाग्रता की कमी देखी जाती है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ लोगों में यह खतरा ज्यादा होता है। इसमें स्लीप एपनिया से पीड़ित लोग, लगातार मानसिक तनाव में रहने वाले व्यक्ति और रात में देर तक मोबाइल या टीवी देखने वाले लोग शामिल हैं।

राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि बार-बार नींद टूटने का मतलब है कि दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पा रहा। जरूरत से ज्यादा सोच, चिंता और तनाव दिल पर सीधा असर डालते हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है।

नींद सुधारने के लिए क्या करें

विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से बचने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं। रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें, ताकि बॉडी क्लॉक सही बनी रहे।

इसके अलावा रात में चाय या कॉफी पीने से बचें और मानसिक तनाव कम करने की कोशिश करें। योग, ध्यान और हल्की एक्सरसाइज नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती है। अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

Leave a comment