दिन में गोरिल्ला बनकर कमाई, रात में पुलिस भर्ती की तैयारी; 20 साल के पीयूष की संघर्ष कहानी

इंदौर के 20 वर्षीय पीयूष परमार पिता की बीमारी के बाद परिवार संभाल रहे हैं। दिन में लॉन्ड्री और गोरिल्ला कॉस्ट्यूम में काम, रात में पुलिस भर्ती की तैयारी।

इंदौर के 20 वर्षीय पीयूष परमार पिता की बीमारी के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे मां के साथ लॉन्ड्री का काम करते हैं, गोरिल्ला कॉस्ट्यूम पहनकर कमाई करते हैं और रात में पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं।

Inspiring Story: इंदौर के पीयूष परमार की जिंदगी संघर्ष और सपने के बीच संतुलन की कहानी है। 20 साल की उम्र में वे बीमार पिता की देखभाल के साथ मां के लॉन्ड्री काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक मदद के लिए 15 किलो का गोरिल्ला कॉस्ट्यूम पहनकर इवेंट्स में काम करते हैं और रात में मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती होने की तैयारी करते हैं।

पिता की बीमारी के बाद बदली जिंदगी

पीयूष परमार इंदौर के एक सामान्य परिवार से आते हैं। कुछ साल पहले तक उनके परिवार में माता-पिता और दो भाई सामान्य जिंदगी जी रहे थे, लेकिन पिता के पैरालाइज होने के बाद परिवार की परिस्थितियां बदल गईं। उनके पिता परिवार में अकेले कमाने वाले थे और बीमारी के बाद काम करने में असमर्थ हो गए।

इसके बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। उन्होंने घर चलाने के लिए लॉन्ड्री और ड्राई क्लीनिंग का काम शुरू किया। पीयूष ने भी मां का साथ देने का फैसला किया और कम उम्र से ही काम में हाथ बंटाने लगे।

सुबह पिता की देखभाल, दिन में लॉन्ड्री का काम

पीयूष का रोज का रूटीन काफी व्यस्त है। दिन की शुरुआत पिता की देखभाल से होती है। वह उन्हें अस्पताल लेकर जाते हैं और इसके बाद मां के साथ लॉन्ड्री और ड्राई क्लीनिंग का काम करते हैं। कपड़ों की डिलीवरी की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने पढ़ाई और अपने सपने को छोड़ने के बजाय काम के साथ तैयारी जारी रखने का फैसला किया। उनके लिए पुलिस की वर्दी पहनना लंबे समय से एक लक्ष्य रहा है।

15 किलो का गोरिल्ला कॉस्ट्यूम पहनकर करते हैं काम

सिर्फ लॉन्ड्री के काम से परिवार का खर्च पूरा करना मुश्किल होने पर पीयूष ने कमाई का दूसरा रास्ता तलाशा। वह करीब 15 किलोग्राम का गोरिल्ला कॉस्ट्यूम पहनकर बर्थडे पार्टियों और अलग-अलग इवेंट्स में लोगों का मनोरंजन करते हैं।

गर्म मौसम में भारी कॉस्ट्यूम पहनकर घंटों काम करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद पीयूष इवेंट्स में लोगों का मनोरंजन करते हैं और इसके बदले मिलने वाली कमाई से परिवार की मदद करते हैं।

काम के दौरान कई बार उन्हें चोट भी लगती है, लेकिन उनका कहना है कि वह अपने परिवार और अपने लक्ष्य के लिए यह मेहनत कर रहे हैं।

रात में पुलिस भर्ती की तैयारी

दिनभर काम करने के बाद जब ज्यादातर लोग आराम करते हैं, तब पीयूष अपनी पढ़ाई शुरू करते हैं। वह लाइब्रेरी जाकर पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं और देर रात तक किताबों के साथ समय बिताते हैं।

पीयूष का लक्ष्य मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती होकर पुलिस अधिकारी बनना है। काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वह अपनी तैयारी के लिए समय निकाल रहे हैं।

पीयूष का कहना है कि वह करीब 10 साल की उम्र से मेहनत कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह कोई कैमरे के लिए बनाई गई कहानी नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक जिंदगी है। वह युवाओं को अपने माता-पिता के लिए अपनी क्षमता के अनुसार काम करने की बात भी कहते हैं।

सोशल मीडिया पर साझा करते हैं अपनी जिंदगी

पीयूष अपने संघर्ष को छिपाने के बजाय सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं। वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @drycleaner_to_dreamer पर काम, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट करते हैं। उनके अकाउंट पर करीब 5 हजार फॉलोअर्स हैं।

उनका सोशल मीडिया नाम भी उनके जीवन के दो पहलुओं को दर्शाता है—एक तरफ परिवार की जरूरतों के लिए ड्राई क्लीनिंग और दूसरी तरफ पुलिस की वर्दी पहनने का सपना।

इंदौर पुलिस ने भी किया सम्मानित

पीयूष की मेहनत और जागरूकता से जुड़े कामों को देखते हुए उन्हें कई कार्यक्रमों में सम्मान मिल चुका है। इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें ट्रैफिक अवेयरनेस अभियानों में भी शामिल किया है।

पीयूष की कहानी में परिवार की जिम्मेदारी, रोजी-रोटी के लिए मेहनत और सरकारी नौकरी के सपने के लिए जारी तैयारी तीनों पहलू साथ दिखाई देते हैं। उनकी दिनचर्या बताती है कि पारिवारिक परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य को छोड़ा नहीं है।

Leave a comment