उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से 23 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं और 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। वाराणसी में गंगा-वरुणा का पानी आबादी में पहुंच गया है, जबकि PM मोदी ने DM और मेयर से हालात की जानकारी ली।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बीच 23 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वाराणसी में गंगा और वरुणा का पानी आबादी में घुसने लगा है और कई इलाकों में नाव से आवागमन हो रहा है। काशी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और मेयर अशोक तिवारी से फोन पर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली।
काशी में बाढ़ के हालात, PM मोदी ने DM-मेयर से ली जानकारी
वाराणसी में गंगा उफान पर हैं और पानी खेतों से होते हुए आबादी वाले इलाकों तक पहुंच गया है। दक्षिण नगवा में गंगा का पानी घरों और गलियों तक पहुंच गया है। नगवां को अस्सी से जोड़ने वाली संकरी सड़क पर जलभराव है और गलियों में नाव चल रही हैं। अब तक 62.48 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
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बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और मेयर अशोक तिवारी से फोन पर बात की। उन्होंने नदी के जलस्तर और राहत शिविरों में उपलब्ध कराई जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित लोगों को युद्धस्तर पर राहत पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने को कहा।
काशी में अब तक 407 परिवार घर छोड़ चुके हैं। सभी 84 घाट पानी में डूबे हुए हैं। मणिकर्णिका घाट पर भी सामान्य स्थानों के बजाय छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
23 जिलों में बाढ़, 16,784 लोगों का रेस्क्यू
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से प्रदेश के 23 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं। अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें बुधवार को रेस्क्यू किए गए 3,042 लोग भी शामिल हैं। राहत और बचाव के लिए बाढ़ चौकियों और मेडिकल टीमों को सक्रिय रखा गया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की बाढ़ से 50 से अधिक गांव प्रभावित हैं। जिले में करीब 650 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 70 पूरी तरह गिर गए। करीब 50 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। एनडीआरएफ ने बाढ़ में फंसे 1,438 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, बारिश और मकान गिरने की घटनाओं में चित्रकूट और कानपुर देहात में कुल पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जिनमें चार बच्चे शामिल हैं।
कानपुर देहात के मूसानगर क्षेत्र में कच्ची छत गिरने से 7 वर्षीय पलक और 3 वर्षीय लविश की मौत हो गई, जबकि उनके पिता मुकेश कुमार घायल हुए। चित्रकूट में भी कच्चे मकान की दीवार गिरने से कल्लू यादव और उनके दो बच्चों अंश व कल्ली की मौत हुई, जबकि उनकी पत्नी और बेटी घायल हैं।
रिहंद बांध ओवरफ्लो, बलिया और बिजनौर में भी बिगड़े हालात
सोनभद्र में प्रदेश का सबसे बड़ा रिहंद बांध ओवरफ्लो होने के बाद पानी की निकासी के लिए पांच गेट खोले गए हैं। बलिया में गंगा और सरयू उफान पर हैं और कई इलाकों में कमर तक पानी पहुंच गया है। यहां सड़कों पर नाव चल रही हैं।
बिजनौर में गंगा का पानी हाईवे के ऊपर से बह रहा है। रायपुर खादर गांव में भी पानी पहुंच गया है और एक बच्चा बैलगाड़ी से स्कूल जाता दिखाई दिया। गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे 10 से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
मिर्जापुर में जलभराव के कारण रेलवे अंडरपास में रोडवेज बस फंस गई, जिसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया। चंदौली में गड़ई नदी उफनाने के बाद बबुरी-अहरौरा मार्ग पर करीब 1 से 1.5 फीट पानी तेज बहाव के साथ सड़क के ऊपर से गुजर रहा है।
अगले पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र, मानसूनी द्रोणी और झारखंड-बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर सक्रिय चक्रवाती सिस्टम के कारण प्रदेश में मानसून मजबूत हुआ है। अगले पांच दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग ने गुरुवार को 67 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिनमें 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। बलिया, वाराणसी समेत आठ जिलों में कक्षा 8वीं तक के स्कूल बंद रखने की जानकारी दी गई है। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, प्रदेश में 1,618 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और 127 से अधिक मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं।









