बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को क्यों बढ़ जाता है खतरा? जानिए बचाव के जरूरी उपाय

तेज गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओ को विशेष सावधानी की जरूरत है, डिहाइड्रेशन, थकान और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। जानिए डॉक्टरों की सलाह, बचाव के तरीके।

देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर पहले ही कई शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। 

ऐसे में तेज गर्मी शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही भी मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी ज्यादा क्यों महसूस होती है?

डॉक्टरों के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है। गर्भ में पल रहे बच्चे तक पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए शरीर लगातार काम करता रहता है।

 ऐसे में जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक गर्मी महसूस होती है।

इस दौरान कई महिलाओं को ज्यादा पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना, सिर दर्द, बेचैनी और थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। लंबे समय तक धूप में रहने या गर्म वातावरण में रहने से स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है।

डिहाइड्रेशन क्यों बन जाता है बड़ी समस्या?

गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी मानी जाती है। शरीर से ज्यादा पसीना निकलने के कारण पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से कम होने लगते हैं। इससे शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और कई बार ब्लड प्रेशर भी प्रभावित हो सकता है।

डिहाइड्रेशन के कारण मुंह सूखना, अत्यधिक प्यास लगना, कमजोरी, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

गर्मी में कौन-कौन सी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण गर्भवती महिलाओं में हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। हीट एक्सॉशन के दौरान शरीर बहुत ज्यादा थक जाता है और लगातार पसीना आने लगता है। महिला को कमजोरी, सिर दर्द, उलझन और मतली महसूस हो सकती है।

अगर स्थिति और गंभीर हो जाए तो हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसमें शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे बेहोशी, तेज बुखार और भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना बेहद जरूरी होता है।

क्या बच्चे की सेहत पर भी पड़ सकता है असर?

डॉक्टरों के मुताबिक लगातार डिहाइड्रेशन और अत्यधिक गर्मी का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है। कुछ मामलों में समय से पहले डिलीवरी यानी प्री-टर्म लेबर का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा कम वजन वाले बच्चों के जन्म की संभावना भी बढ़ जाती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां की सेहत सीधे तौर पर बच्चे के विकास से जुड़ी होती है। इसलिए गर्मियों में अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिलाएं कैसे रखें अपना ख्याल?

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। गर्भवती महिलाओं को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इसके अलावा नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का जूस भी शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

साथ ही संतुलित और हल्का भोजन करना भी जरूरी है। डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दही और पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना गर्मी में परेशानी बढ़ा सकता है।

धूप और गर्म वातावरण से बचना जरूरी

गर्भवती महिलाओं को दोपहर की तेज धूप से बचने की सलाह दी जाती है। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो सिर ढककर निकलना चाहिए और हल्के व ढीले कपड़े पहनने चाहिए। लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे परेशानी बढ़ने का खतरा रहता है।

घर के अंदर भी ठंडा और हवादार वातावरण बनाए रखना जरूरी है ताकि शरीर को आराम मिल सके।

पर्याप्त आराम क्यों है जरूरी?

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को सामान्य से ज्यादा आराम की जरूरत होती है। गर्मियों में यह जरूरत और बढ़ जाती है। ज्यादा थकान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, इसलिए बीच-बीच में आराम करना जरूरी है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए। इससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है और कमजोरी कम महसूस होती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यदि गर्भवती महिला को लगातार चक्कर आना, तेज सिर दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी महसूस होना या बच्चे की हलचल कम महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये संकेत शरीर में गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

समय रहते मेडिकल सलाह लेने से कई बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

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