Vitamin D for Babies: जन्म के बाद शिशु को कब तक देना चाहिए विटामिन डी सप्लीमेंट, जाने डॉक्टर की अहम सलाह

Vitamin D for Babies: जन्म के बाद शिशु को कब तक देना चाहिए विटामिन डी सप्लीमेंट, जाने डॉक्टर की अहम सलाह

नवजात शिशुओं के स्वस्थ विकास के लिए विटामिन डी सप्लीमेंट बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के कुछ दिनों बाद से यह सप्लीमेंट शुरू कर कम से कम एक वर्ष तक देना चाहिए। इसकी कमी से हड्डियों की कमजोरी, रिकेट्स और विकास में देरी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

Vitamin D for Babies: नवजात शिशुओं के बेहतर शारीरिक विकास के लिए डॉक्टर जन्म के कुछ दिनों के भीतर विटामिन डी सप्लीमेंट शुरू करने की सलाह देते हैं। यह सिफारिश खासतौर पर उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है जो पूरी तरह ब्रेस्टफीडिंग पर निर्भर होते हैं या जिन्हें पर्याप्त धूप नहीं मिलती। विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन डी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसे कम से कम 12 महीने तक देना जरूरी होता है, ताकि बच्चे का विकास सही तरीके से हो सके और भविष्य की स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव हो सके।

जन्म के बाद कब से और कितनी उम्र तक जरूरी है विटामिन डी

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही शिशु को विटामिन डी की सप्लीमेंट देना शुरू कर देना चाहिए। आमतौर पर यह सप्लीमेंट कम से कम 12 महीने की उम्र तक दिया जाता है, ताकि बच्चे की हड्डियों का सही विकास हो सके।

अगर बच्चा पूरी तरह ब्रेस्टफीडिंग पर है, तो डॉक्टर एक साल से अधिक समय तक भी विटामिन डी जारी रखने की सलाह दे सकते हैं। वहीं, कुछ खास परिस्थितियों में जैसे समय से पहले जन्म या पोषण की कमी होने पर यह अवधि दो साल तक भी बढ़ाई जा सकती है।

विटामिन डी की कमी से बच्चों में हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं

विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इस स्थिति में हड्डियां कमजोर और मुलायम हो जाती हैं, जिससे पैरों का टेढ़ा होना और शारीरिक विकास में देरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इसके अलावा, दांत निकलने में देरी, मांसपेशियों की कमजोरी और इम्यूनिटी में कमी भी विटामिन डी की कमी के संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक कमी रहने से बच्चे के संपूर्ण शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

सप्लीमेंट देने से पहले डॉक्टर की सलाह क्यों जरूरी है

विशेषज्ञों का कहना है कि हर बच्चे की पोषण जरूरत अलग होती है, इसलिए विटामिन डी की खुराक और अवधि डॉक्टर ही तय करते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट देना बच्चे के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

नियमित हेल्थ चेकअप से बच्चे के विकास और पोषण स्तर पर नजर रखना जरूरी है। इससे समय रहते किसी भी कमी की पहचान कर उचित इलाज और सप्लीमेंट दिया जा सकता है।

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